चेन्नई की एक स्पेशल NIA कोर्ट ने साल 2016 में हिंदू मुन्नानी नेता सी. शशिकुमार की हत्या के मामले में प्रतिबंधित संगठन PFI के 4 सदस्यों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
चेन्नई की पूनमल्ली स्थित स्पेशल NIA कोर्ट ने कोयंबटूर में हुए हिंदू मुन्नानी नेता सी. शशिकुमार मर्डर केस में अपना फैसला सुनाते हुए सजा का ऐलान किया है। अदालत ने सद्दाम हुसैन, सुबैर, मुबारक और मोहम्मद रफीकुल हसन को हत्या, आपराधिक साजिश और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का दोषी पाया है। कोर्ट ने प्रत्येक दोषी पर ₹30,000 का जुर्माना भी लगाया है।
यह मामला साल 2016 का है, जब इस घटना के बाद तमिलनाडु के 6 जिलों में भारी तनाव फैल गया था। तत्कालीन कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को 300 से ज्यादा मामले दर्ज करने पड़े थे। साल 2018 में केंद्र सरकार ने जांच को NIA को सौंप दिया था। 75 गवाहों के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर यह लंबी कानूनी प्रक्रिया पूरी हुई है।
सितंबर 2022 में सरकार द्वारा PFI को प्रतिबंधित घोषित किए जाने के बाद से यह पहला मौका है जब NIA की निगरानी में PFI सदस्यों को इस तरह की सजा सुनाई गई है। हालांकि, कोर्ट ने पांचवें आरोपी अबू उर्फ सैयद अबुताहिर को बरी कर दिया है। इस फैसले के बाद NIA कोर्ट के रिकॉर्ड की समीक्षा कर रही है और बरी किए गए आरोपी के खिलाफ उच्च अदालत में अपील करने पर विचार कर रही है।
