NIA की विशेष अदालत ने अमेरिकी नागरिक Matthew VanDyke समेत सात विदेशी नागरिकों को एक महीने के लिए अपने देश लौटने की अनुमति दे दी है। इन सभी को मार्च में म्यांमार में ड्रोन ट्रेनिंग से जुड़े एक टेरर कॉन्स्पिरेसी केस में गिरफ्तार किया गया था।
दिल्ली की NIA स्पेशल कोर्ट ने अमेरिकी नागरिक Matthew VanDyke और छह यूक्रेनी नागरिकों को 1 महीने के लिए अपने देश जाने की राहत दी है। इन लोगों को इस साल मार्च में गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप था कि वे म्यांमार सीमा पर सक्रिय सशस्त्र समूहों को ड्रोन ट्रेनिंग, असेंबली और जैमिंग तकनीक उपलब्ध करा रहे थे।
राजनीतिक विवाद और UAPA पर सवाल
अदालत के इस फैसले के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केस की कानूनी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि 8 सितंबर को दाखिल चार्जशीट से UAPA जैसी सख्त धाराओं को हटाना किसी जांच का नतीजा नहीं, बल्कि विदेशी कूटनीतिक दबाव के आगे झुकना है।
प्रशासनिक पारदर्शिता पर उठते सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इस मामले में केंद्र सरकार को घेरा है। उनका कहना है कि ये विदेशी नागरिक मिजोरम के रास्ते म्यांमार बॉर्डर तक कैसे पहुंचे, यह सुरक्षा तंत्र की बड़ी चूक है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि विदेशों से डिपोर्ट होने वाले भारतीय नागरिकों के लिए नियम बहुत सख्त होते हैं, जबकि इन विदेशी नागरिकों के लिए अदालत की नरम रुख ने कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया है।
फिलहाल, सरकार की ओर से UAPA हटाने के कारणों पर कोई औपचारिक बयान नहीं आया है। इन सभी विदेशियों को अब अदालत की निगरानी में जल्द ही भारत से रवाना होना है, लेकिन इस केस की कानूनी और कूटनीतिक गुत्थियां अभी भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
