मुंबई में 2 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शन में बच्चों को कथित रूप से मानव ढाल की तरह इस्तेमाल करने के मामले में NHRC ने कड़ा रुख अपना लिया है। नियामक संस्था ने Juvenile Justice Act के उल्लंघन की जांच शुरू कर दी है और सभी डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मुंबई के शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर, 2026 को हुए प्रदर्शन के दौरान नाबालिगों को 'ह्यूमन शील्ड' के रूप में इस्तेमाल करने की खबरों पर संज्ञान लिया है। Cockroach Janta Party द्वारा आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई थी, लेकिन अब यह मामला 'सेवा न्याय उत्थान फाउंडेशन' की शिकायत के बाद कानूनी पचड़े में फंस गया है।
कानून का उल्लंघन और जांच का दायरा
आयोग यह जांच कर रहा है कि क्या ये हरकतें 'जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) एक्ट, 2015' का उल्लंघन है। विशेष रूप से, धारा 75 (बच्चों के प्रति क्रूरता) और धारा 83(2) (बच्चों का अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल) के तहत जांच की जा रही है। इसका परिणाम सार्वजनिक प्रदर्शनों में बच्चों की सुरक्षा और आयोजकों की जवाबदेही तय करने के लिए एक नजीर बन सकता है।
डिजिटल सबूतों पर जोर
जांच को पुख्ता बनाने के लिए, NHRC ने मुंबई पुलिस को प्रदर्शन के दौरान लिए गए सभी फोटो और वीडियो का फॉरेंसिक विश्लेषण करने को कहा है। मकसद यह पता लगाना है कि क्या बच्चों को शामिल करने की योजना पहले से बनी थी। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और X Corp. को निर्देश दिया गया है कि वे घटना से जुड़े डिजिटल लॉग्स और सोशल मीडिया कंटेंट को सुरक्षित रखें।
आयोग ने सभी संबंधित एजेंसियों को 7 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) सौंपने का आदेश दिया है, जो इस मामले में अगली महत्वपूर्ण अपडेट होगी।
