National Human Rights Commission (NHRC) ने पंजाब में कथित एक्स्ट्रा-जुडिशियल किलिंग्स मामले पर सरकार को घेरा है। आयोग ने राज्य सरकार की इंटरनल जांच को सिरे से खारिज कर दिया है और एक नई, स्वतंत्र रिपोर्ट के लिए **4 हफ्ते** की मोहलत दी है।
क्या है पूरा मामला?
NHRC ने 2 नवंबर, 2026 को जारी अपने कड़े निर्देश में पंजाब सरकार को हिरासत में प्रताड़ना और फर्जी एनकाउंटर के आरोपों की स्वतंत्र जांच करने का आदेश दिया है। आयोग ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई है कि पंजाब सरकार ने अपनी पिछली रिपोर्ट में उसी विभाग के दस्तावेजों का इस्तेमाल किया, जिस पर खुद ये गंभीर आरोप लगे हैं।
DGP पर उठे गंभीर सवाल
यह सारा विवाद जुलाई 2025 में मोहाली के रहने वाले निखिल सराफ द्वारा दायर एक शिकायत से शुरू हुआ था। आरोप है कि पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने अपने मातहतों की परफॉर्मेंस सुधारने के लिए कथित तौर पर एक्स्ट्रा-जुडिशियल एनकाउंटर का सहारा लिया। मामले के सबूत के तौर पर एक सोशल मीडिया पोस्ट और व्हाट्सएप मैसेज का जिक्र भी किया गया है, जिसने राज्य पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डेडलाइन और कानूनी शिकंजा
NHRC ने पंजाब के मुख्य सचिव और गृह सचिव को 10 दिसंबर, 2026 की डेडलाइन दी है। अगर प्रशासन इस समय सीमा के भीतर स्वतंत्र जांच रिपोर्ट पेश नहीं करता है, तो आयोग 'Protection of Human Rights Act, 1993' की धारा 13 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कर सकता है। यह कदम राज्य प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि अब उन्हें अपनी जवाबदेही साबित करनी होगी।
