Ganga Construction Norms: NGT की सख्ती से रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स पर मंडराया कानूनी संकट

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AuthorNeha Patil|Published at:
Ganga Construction Norms: NGT की सख्ती से रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स पर मंडराया कानूनी संकट

National Green Tribunal (NGT) ने गंगा किनारे निर्माण के नए नियमों की समीक्षा शुरू कर दी है। जल शक्ति मंत्रालय के **7 अगस्त, 2026** के संशोधन को चुनौती मिलने से इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट सेक्टर में भारी अनिश्चितता है। निवेशकों की नजर अब **27 अक्टूबर, 2026** की अगली सुनवाई पर टिकी है।

नियम में क्या है बदलाव?

केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने गंगा नदी के किनारों पर निर्माण को लेकर एक नया 'थ्री-टियर जोनल सिस्टम' लागू किया था, जिसने पुराने 'कंस्ट्रक्शन-फ्री' स्टेटस को बदल दिया। अब इस नीति को NGT में कानूनी चुनौती दी गई है। ट्रिब्यूनल ने केंद्र और संबंधित एजेंसियों को नोटिस जारी कर 27 अक्टूबर, 2026 तक जवाब मांगा है।

निवेशकों के लिए क्यों है यह अहम?

पुराने सख्त नियमों के हटने से रियल एस्टेट डेवलपर्स को राहत मिली थी, लेकिन अब कोर्ट की दखलअंदाजी से स्थिति फिर से 'वेट एंड वॉच' वाली हो गई है। अगर अदालत इन नियमों को रद्द करती है या उनमें सख्ती लाती है, तो मौजूदा प्रोजेक्ट्स के डिजाइन बदलने या उनकी लीगल वैधता पर संकट आ सकता है।

राज्य का रुख और अन्य कार्रवाई

वहीं दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश सरकार ने गंगा के 700 किलोमीटर के हिस्से में 7,350 से ज्यादा पिलर लगाकर सीमाओं का सीमांकन पूरा कर लिया है। इसी बीच, NGT अवैध अतिक्रमण पर भी सख्त है। झाँसी में 'Sanfran Sarovar Heights' प्रोजेक्ट द्वारा Pahuj नदी के बहाव में बाधा डालने के आरोपों की जांच चल रही है, जो पर्यावरण सुरक्षा के प्रति ट्रिब्यूनल की कड़ी नीति को दर्शाता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.