National Green Tribunal (NGT) ने बीकानेर की इंडस्ट्रियल यूनिट्स पर सख्त एक्शन लिया है और जयपुर में भूजल दोहन की जांच शुरू की है। यह घटनाक्रम कंपनियों के लिए पर्यावरण नियमों के अनुपालन (Compliance) के बढ़ते दबाव को दर्शाता है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने राजस्थान में पर्यावरण नियमों के पालन को लेकर अपना शिकंजा कस दिया है। ट्रिब्यूनल के ताजा आदेशों का सीधा असर राज्य की औद्योगिक गतिविधियों पर पड़ रहा है। यह पूरी हलचल दिखाती है कि अब कंपनियों के लिए 'ऑपरेशनल कंप्लायंस' को नजरअंदाज करना कितना महंगा पड़ सकता है।
बीकानेर में फैक्ट्रियों पर एक्शन
बीकानेर के खारा इंडस्ट्रियल एरिया में नियमों की धज्जियां उड़ाने वाली 21 इंडस्ट्रियल यूनिट्स को पहले ही बंद किया जा चुका है। NGT की सेंट्रल बेंच ने राजस्थान स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे पर्यावरण मानकों का कड़ाई से पालन करवाएं। ट्रिब्यूनल ने दिसंबर के मध्य तक एक प्रोग्रेस रिपोर्ट मांगी है, जिसमें बंद की गई इकाइयों की स्थिति और वृक्षारोपण जैसे सुधार कार्यों का ब्यौरा देना होगा।
जयपुर में भूजल पर जांच
दूसरी तरफ, जयपुर में अवैध रूप से भूजल निकालने के मामले की जांच शुरू हो गई है। एक संयुक्त समिति 'बालाजी वाटर सप्लायर्स' के खिलाफ लगे आरोपों की जांच करेगी। आरोप है कि निजी ऑपरेटर हाई-पावर पंपों का इस्तेमाल कर भूजल के भंडारों को खाली कर रहे हैं। यदि यह जांच कंपनियों के खिलाफ जाती है, तो इलाके में पानी के इस्तेमाल पर सख्त पाबंदियां लग सकती हैं, जो वहां काम करने वाली फैक्ट्रियों के लिए बड़ा जोखिम बन सकती हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
NGT की यह सक्रियता निवेशकों के लिए एक स्पष्ट संकेत है—अब ESG (Environmental, Social, and Governance) नियमों का पालन करने वाली कंपनियां ही लॉन्ग टर्म में टिक सकेंगी। जो कंपनियां प्रदूषण नियंत्रण और वेस्ट मैनेजमेंट पर खर्च नहीं बढ़ाएंगी, उन पर न केवल जुर्माना लगने का डर है, बल्कि परिचालन बंद होने का खतरा भी है। निवेशकों को सलाह है कि वे उन इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स पर नजर रखें जहां रेगुलेटरी सख्ती बढ़ रही है, क्योंकि इसका सीधा असर कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ सकता है।
