NGT का कड़ा रुख: औद्योगिक स्प्रिंग वॉटर के इस्तेमाल पर समीक्षा, कंपनियों के लिए बढ़ सकती है मुश्किल

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
NGT का कड़ा रुख: औद्योगिक स्प्रिंग वॉटर के इस्तेमाल पर समीक्षा, कंपनियों के लिए बढ़ सकती है मुश्किल

National Green Tribunal (NGT) ने मिनिस्ट्री ऑफ जल शक्ति को निर्देश दिया है कि वह निजी उद्योगों द्वारा स्प्रिंग वॉटर निकालने के नियमों को स्पष्ट करे। इसके साथ ही दिल्ली के सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर विवाद पर भी सख्त आदेश दिए गए हैं, जो पर्यावरण नियमों के अनुपालन की दिशा में बढ़ते दबाव को दर्शाते हैं।

स्प्रिंग वॉटर पर NGT की सख्ती

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने निजी उद्योगों द्वारा प्राकृतिक झरने के पानी (Spring Water) के इस्तेमाल को लेकर बड़ी समीक्षा शुरू की है। ट्रिब्यूनल ने मिनिस्ट्री ऑफ जल शक्ति से पूछा है कि क्या स्प्रिंग वॉटर को मौजूदा भूजल (Groundwater) कानूनों के तहत लाया जाना चाहिए। यह आदेश Mohan Meakin की कसौली डिस्टिलरी से जुड़े कानूनी मामले के बाद आया है, जिसमें कंपनी की जल दोहन प्रथाओं पर सवाल उठाए गए थे।

निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि Mohan Meakin एक अनलिस्टेड पब्लिक लिमिटेड कंपनी है। इसके शेयर प्रमुख एक्सचेंज जैसे NSE या BSE पर ट्रेड नहीं होते, बल्कि 'ग्रे मार्केट' में मिलते हैं। ऐसे शेयरों में लिक्विडिटी कम होती है और रेगुलेटरी निगरानी सीमित होती है, जो इसे एक हाई-रिस्क निवेश बनाता है।

दिल्ली में प्रशासनिक खींचतान

NGT ने दिल्ली में सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर चल रहे प्रशासनिक गतिरोध को भी गंभीरता से लिया है। Delhi Jal Board और Delhi Urban Shelter Improvement Board के बीच जिम्मेदारी को लेकर चल रही खींचतान पर ट्रिब्यूनल ने साफ कर दिया है कि जल निकासी और स्वच्छता उपलब्ध कराना एक कानूनी बाध्यता है।

यह विवाद अर्बन सैनिटेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सरकारी निकायों के बीच विवाद से प्रोजेक्ट में देरी और पेमेंट साइकिल पर असर पड़ता है, जिससे कॉन्ट्रैक्ट एग्जीक्यूशन पर भी निगरानी बढ़ जाती है।

पर्यावरण संरक्षण का अभियान

इसके अलावा, Tamil Nadu Pollution Control Board को Tambaram स्थित Veeraraghavan लेक की सफाई का काम सौंपा गया है। सीवेज के अनियंत्रित बहाव से खराब हुए इस जलाशय को ठीक करने के लिए अंडरग्राउंड सीवरेज नेटवर्क बनाने के आदेश दिए गए हैं। ये कदम दर्शाते हैं कि देश भर में पर्यावरण मानकों को लेकर सख्ती बढ़ रही है, जिसका सीधा असर संवेदनशील जल स्रोतों के पास काम करने वाली इंडस्ट्रियल और म्युनिसिपल एंटिटीज के कंप्लायंस कॉस्ट (Compliance Cost) पर पड़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.