National Green Tribunal (NGT) ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट में पर्यावरण को हुए नुकसान पर सख्त रुख अपनाया है। इसमें Rail Vikas Nigam Limited (RVNL) और Megha Engineering को घेरे में लिया गया है।
National Green Tribunal (NGT) ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट में पर्यावरण नियमों की अनदेखी को लेकर तीखी नाराजगी जताई है। मामला जावड़ी गांव में 'चोपड़ा गधेरा' नामक फ्रेश वॉटर स्ट्रीम को हुए नुकसान का है, जिसे रेल लाइन के निर्माण के दौरान काफी क्षति पहुंची थी।\n\n### भारी जुर्माना और जवाबदेही की तलवार\n\nजुलाई 2026 में दिए गए निर्देशों के बावजूद, संबंधित कंपनियों ने अब तक पर्यावरण बहाली (ecological restoration) का काम पूरा नहीं किया है। कोर्ट के लिए सबसे बड़ी चिंता ₹2.04 करोड़ का वह पेंडिंग जुर्माना है, जिसका भुगतान अब तक नहीं हुआ है। जस्टिस अरुण कुमार त्यागी ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव और प्रधान मुख्य वन संरक्षक को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कोर्ट के आदेशों की अनदेखी क्यों की गई।\n\n### निवेशकों के लिए चेतावनी\n\nइन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों के लिए पर्यावरण संबंधी अनुपालन (Environmental Compliance) एक बहुत ही महत्वपूर्ण 'मॉनिटरेबल' फैक्टर है। हिमालय जैसे संवेदनशील इलाकों में काम करते समय नियमों का उल्लंघन न केवल भारी जुर्माना, बल्कि 'स्टॉप-वर्क' ऑर्डर और प्रोजेक्ट में लंबी देरी का कारण बन सकता है, जिससे सीधे तौर पर निवेशकों की वैल्यू प्रभावित होती है।\n\n### सख्त होता रेगुलेटरी रुख\n\nNGT केवल इसी प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और प्रयागराज में भी अवैध कचरा निपटान और जल निकायों की बहाली को लेकर सख्त रुख अपना रहा है। आयोग ने अलग-अलग विभागों को नोटिस जारी किए हैं, जो इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में इंडस्ट्रियल और इंफ्रा प्रोजेक्ट्स पर监管 (监管) का शिकंजा और कसने वाला है।\n\nअगली सुनवाई दिसंबर 2026 की शुरुआत में होनी है, जहां यह साफ होगा कि क्या कंपनियों ने जुर्माने का भुगतान किया है और बहाली की योजना पर कितना काम हुआ है। निवेशकों की नजर अब इन कानूनी अपडेट्स और कंपनी के मैनेजमेंट की प्रतिक्रिया पर टिकी होगी।
