NEET-UG पेपर लीक: कोर्ट ने पॉलीग्राफ टेस्ट की अर्जी ठुकराई, चार्जशीट पर अगली सुनवाई 12 अगस्त को

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
NEET-UG पेपर लीक: कोर्ट ने पॉलीग्राफ टेस्ट की अर्जी ठुकराई, चार्जशीट पर अगली सुनवाई 12 अगस्त को

दिल्ली की एक अदालत ने NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले के तीन आरोपियों की पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की अर्जी को खारिज कर दिया है। CBI ने इस मांग का विरोध किया था, वहीं कोर्ट ने करीब 20,000 पन्नों की चार्जशीट पर फैसला 12 अगस्त तक टाल दिया है।

कोर्ट का फैसला: पॉलीग्राफ टेस्ट की अर्जी खारिज

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में तीन आरोपियों - मंगिलल बिवाल, विकास बिवाल और दिनेश बिवाल - की पॉलीग्राफ, ब्रेन मैपिंग और लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की मांग को सोमवार को ठुकरा दिया। आरोपियों का कहना था कि इन टेस्ट से उनकी बेगुनाही साबित होगी, लेकिन केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इसका पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि जांच पूरी हो चुकी है और यह अर्जी स्वीकार करने लायक नहीं है।

चार्जशीट पर फैसला टला, न्यायिक हिरासत बढ़ी

कोर्ट ने 13 आरोपियों के खिलाफ CBI द्वारा दायर की गई लगभग 20,000 पन्नों की चार्जशीट को स्वीकार करने पर भी अपना फैसला फिलहाल टाल दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी। इस दौरान, कोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ा दी है। चार्जशीट में भारतीय न्याय संहिता के तहत आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के उल्लंघन के आरोप शामिल हैं।

NTA की बढ़ती चिंताएं और बढ़ता खर्च

यह घटनाक्रम भारतीय शिक्षा और परीक्षा क्षेत्र में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के सामने मौजूद प्रशासनिक और प्रतिष्ठा संबंधी चुनौतियों को उजागर करता है। इस घोटाले के चलते परीक्षा निकायों के सुरक्षा और पारदर्शिता के तरीकों में एक बड़ा बदलाव आया है। NTA ने पहले ही लगभग ₹7.5 करोड़ की लागत वाली फैसिलिटी सुरक्षा और बचाव उपायों को उन्नत करने के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं।

निवेशकों के लिए क्या है मायने?

ये परिचालन बदलाव बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय परीक्षाओं के संचालन की लागत में वृद्धि का संकेत देते हैं। कानूनी कार्यवाही के अलावा, यह क्षेत्र अब गहन जांच के दायरे में है। निवेशक और विश्लेषक इस बात पर नजर रख रहे हैं कि ये नियामक बदलाव और परीक्षा की सत्यनिष्ठा पर बढ़ा हुआ ध्यान, टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनियों के परिचालन बजट और भविष्य के अनुबंधों को कैसे प्रभावित कर सकते हैं। हितधारकों के लिए जोखिम यह है कि सख्त सरकारी निगरानी से अनुपालन लागत बढ़ सकती है, जिससे परीक्षा प्रक्रिया अधिक कठोर और महंगी हो जाएगी।

अगले महत्वपूर्ण अपडेट के लिए 12 अगस्त को कोर्ट के फैसले का इंतजार रहेगा कि वह चार्जशीट पर संज्ञान लेता है या नहीं। साथ ही, NTA द्वारा सुरक्षा आर्किटेक्चर और नीतिगत बदलावों को लेकर की जाने वाली घोषणाएं भी परीक्षा परिदृश्य पर इसके दीर्घकालिक प्रभाव को समझने के लिए महत्वपूर्ण होंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.