NCLT ने Subhash Chandra के लिए ₹6.25 करोड़ के सेटलमेंट प्लान पर फिलहाल रोक लगा दी है। बैंकों ने **99.97%** के भारी-भरकम 'हेयरकट' का विरोध किया था, जिसके बाद अब एक 5 सदस्यीय विशेष बेंच मामले की फिर से सुनवाई करेगी।
कानूनी दांव-पेच और एसेट फ्रीज
NCLT ने अगस्त 2026 के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें Subhash Chandra को ₹6.25 करोड़ के भुगतान के साथ सेटलमेंट की मंजूरी मिली थी। असल में उन पर कुल क्लेम ₹22,006 करोड़ से ज्यादा का है। इस फैसले के बाद अब वे अपनी किसी भी संपत्ति को न तो बेच सकते हैं और न ही कहीं ट्रांसफर कर सकते हैं।
क्यों मचा है बवाल?
इस मामले में विवाद तब गहराया जब प्रमुख कर्जदाताओं ने 99.97% तक के 'हेयरकट' (कर्ज माफी) का विरोध किया। लेंडर्स का कहना है कि उन्हें उनकी मूल राशि का बहुत छोटा हिस्सा ही वापस मिल रहा है। इस खींचतान के कारण अब Justice Anupinder Singh Grewal की अध्यक्षता में एक 5 सदस्यीय विशेष बेंच का गठन किया गया है, जो इस पूरे मामले की नए सिरे से समीक्षा करेगी।
क्या है Subhash Chandra का पक्ष?
Subhash Chandra का कहना है कि Essel Group के पर्सनल गारंटर के तौर पर उन पर पूरे कर्ज की सीधी जिम्मेदारी नहीं बनती। उनका दावा है कि 2019 के फाइनेंशियल क्राइसिस के बाद ग्रुप पहले ही करीब ₹43,000 करोड़ का भुगतान कर चुका है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई बेंच इस सेटलमेंट को मंजूरी देती है या फिर इसे खारिज कर बैंकों की मांग को स्वीकार करती है।
