Subhash Chandra: NCLT से बड़ी राहत, ₹22,000 करोड़ के कर्ज पर मात्र 0.03% की सेटलमेंट को मंजूरी

LAWCOURT
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
Subhash Chandra: NCLT से बड़ी राहत, ₹22,000 करोड़ के कर्ज पर मात्र 0.03% की सेटलमेंट को मंजूरी

NCLT ने Zee Group के फाउंडर Subhash Chandra के पर्सनल इनसॉल्वेंसी प्लान को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत ₹22,006.57 करोड़ के क्लेम के बदले केवल ₹6.5 करोड़ का भुगतान किया जाएगा, जो क्रेडिटर्स के लिए लगभग 0.03% की रिकवरी है।

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के इस फैसले ने वित्तीय जगत में हलचल मचा दी है। ट्रिब्यूनल ने Subhash Chandra के पर्सनल इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्लान को तब हरी झंडी दी, जब दिल्ली बेंच के सदस्यों के बीच इस पर मतभेद थे। गतिरोध को दूर करने के लिए तीसरे जुडिशियल मेंबर Nilesh Sharma की नियुक्ति की गई, जिन्होंने अंततः इस प्रस्ताव को पारित किया।

विवाद की जड़ और क्रेडिटर्स का विरोध

यह मामला तब शुरू हुआ जब Subhash Chandra ने Essel Group से जुड़ी कंपनी 'Vivek Infracon' के ₹170 करोड़ के लोन के लिए पर्सनल गारंटी दी थी, जो 2022 में डिफॉल्ट हो गई थी। हालांकि नवंबर 2024 में हुए वोटिंग में 80.814% क्रेडिटर्स ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, लेकिन HDFC Bank, Axis Bank, Canara Bank, RBL Bank, Union Bank of India और LIC Housing Finance जैसे बड़े बैंकों ने इसका कड़ा विरोध किया था।

रेगुलेटरी चुनौतियां

विरोध करने वाले क्रेडिटर्स ने सवाल उठाए हैं कि ₹6.5 करोड़ का पेआउट कुल कर्ज की तुलना में बहुत कम है और उन्होंने वोटिंग प्रक्रिया में 'रिलेटेड-पार्टी' के हस्तक्षेप का भी आरोप लगाया है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब प्रमोटर ग्रुप पहले ही रेगुलेटरी जांच का सामना कर रहा है। गौरतलब है कि अगस्त 2026 में SEBI ने Subhash Chandra और Punit Goenka पर सिक्योरिटीज मार्केट में एक साल का प्रतिबंध लगाया था।

अब रेजोल्यूशन प्रोफेशनल को क्रेडिटर्स की लिस्ट को फाइनल कर ₹6.5 करोड़ की राशि का वितरण शुरू करना होगा। यह केस भारत में पर्सनल इनसॉल्वेंसी प्रोसीडिंग्स की जटिलताओं को उजागर करता है, जहां कर्ज और उपलब्ध संपत्ति के बीच का अंतर काफी गहरा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.