NCLAT ने Gujarat Hydrocarbons and Power SEZ के लिए Zaveri Group के रेजोल्यूशन प्लान को खारिज कर दिया है। डॉक्यूमेंटेशन में बड़ी गलतियों और जमीन से जुड़े अनवेरिफाइड दावों के कारण अब पूरी प्रक्रिया को फिर से शुरू करने का आदेश दिया गया है।
नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने Gujarat Hydrocarbons and Power SEZ Ltd (GHPSL) के रेजोल्यूशन प्लान को रद्द कर दिया है। इस फैसले के साथ ही कंपनी का इनसॉल्वेंसी प्रोसेस वापस शुरुआती चरण में पहुंच गया है। ट्रिब्यूनल ने Zaveri Group की बोली को प्रक्रियागत खामियों के चलते अवैध करार दिया है।
गलतियों की वजह से फंसी डील
जांच में सामने आया कि यह रेजोल्यूशन प्लान काफी कमजोर आधार पर टिका था। बोली लगाने वाली कंपनी ने 450 हेक्टेयर की जमीन को SEZ स्टेटस से बाहर करने का एक अनवेरिफाइड दावा किया था। NCLAT ने पाया कि इसके लिए Gujarat Industrial Development Corporation (GIDC) से कोई सहमति नहीं ली गई थी, जो कि जमीन का मालिक है।
इनफॉर्मेशन मेमोरेंडम में बड़ी चूक
ट्रिब्यूनल ने 'इनफॉर्मेशन मेमोरेंडम' में गंभीर गलतियां पकड़ी हैं। इसमें SREI Infrastructure Finance Ltd के क्लेम अमाउंट को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया था और Assam Company India Ltd के वर्गीकरण (classification) में भी गड़बड़ी पाई गई। अदालत का मानना है कि चूंकि यही दस्तावेज बोलीदाताओं के लिए मुख्य जानकारी का जरिया होता है, इसलिए इसमें गलतियां होना पूरी प्रक्रिया को कानूनी रूप से अमान्य बनाता है।
अब आगे क्या होगा?
हालांकि GHPSL एक प्राइवेट और अनलिस्टेड कंपनी है, इसलिए इसका असर सीधे शेयर बाजार पर नहीं पड़ेगा, लेकिन यह फैसला इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल्स के लिए एक बड़ा सबक है। अब एक नए रेजोल्यूशन प्रोफेशनल को नियुक्त किया जाएगा, जो पूरी जानकारी की दोबारा जांच करेगा और नए सिरे से बोलियां आमंत्रित की जाएंगी।
