मुंबई में बढ़ते प्रदूषण और स्मॉग के बीच Bombay High Court ने प्रशासन को फटकार लगाई है। कोर्ट ने अधिकारियों से तुरंत एक्शन प्लान बनाने को कहा है और **26 अक्टूबर** तक अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) जमा करने का आदेश दिया है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
बॉम्बे हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने शहर की खराब होती एयर क्वालिटी को लेकर चिंता जताई है। जस्टिस जीएस कुलकर्णी और डॉ. नीला गोखले ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि मुंबई में स्मॉग का स्तर अब दिल्ली जैसा या उससे भी बुरा होता जा रहा है। कोर्ट ने BMC और MPCB की कार्यप्रणाली पर कड़ा असंतोष जाहिर किया है।
प्रशासन के लिए क्या हैं नए निर्देश?
कोर्ट ने Mumbai Police Commissioner को तत्काल प्रभाव से सभी स्टेशन इंचार्जों के साथ एक आपातकालीन बैठक करने का आदेश दिया है। प्रशासन को अब एक औपचारिक Standard Operating Procedure (SOP) तैयार करनी होगी, ताकि अवैध पटाखों और अनधिकृत जुलूसों पर रोक लगाई जा सके। प्रशासन को अपनी कार्रवाई का पूरा ब्योरा 26 अक्टूबर, 2026 तक कोर्ट के सामने एफिडेविट के जरिए पेश करना होगा।
बिजनेस और कंस्ट्रक्शन पर क्या होगा असर?
यह न्यायिक हस्तक्षेप मुंबई के रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए एक बड़ी चेतावनी है। जिस तरह से अन्य बड़े शहरों में GRAP (Graded Response Action Plan) लागू होता है, वैसी ही सख्ती मुंबई में भी देखने को मिल सकती है। निवेशकों को आने वाले दिनों में कंस्ट्रक्शन साइट्स पर काम रुकने या सख्त नियमों के लागू होने के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि प्रशासन अब किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
