Mumbai Police की Economic Offences Wing ने Suraksha Realty के डायरेक्टर्स के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के आरोपों की जांच शुरू कर दी है। मामला Jaiprakash Infratech के अधिग्रहण से जुड़ा है, जिसमें डिजिटल सिग्नेचर के गलत इस्तेमाल का दावा किया गया है।
मुंबई पुलिस की Economic Offences Wing (EOW) ने Suraksha Realty के डायरेक्टर्स के खिलाफ फॉरजरी और क्रिमिनल कॉन्स्पिरेसी के तहत औपचारिक जांच शुरू कर दी है। यह पूरा मामला Jaiprakash Infratech (JIL) के विवादास्पद अधिग्रहण से जुड़ा है, जो पिछले कई सालों से इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया से गुजर रही है। यह जांच Suraksha Realty के एक डायरेक्टर विजयकुमार मोहनलाल पारेख की शिकायत पर शुरू की गई है।
डिजिटल सिग्नेचर का खेल
शिकायत के मुताबिक, Suraksha Realty और Lakshdeep Investments & Finance का कंसोर्टियम 2019 में ही बिडिंग प्रोसेस से बाहर होने की योजना बना रहा था, क्योंकि क्रेडिटर्स ने उनके प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। आरोप है कि वालिया ग्रुप ने बिना जरूरी इंटरनल अप्रूवल के अकेले ही बोली जारी रखी। जांच का मुख्य केंद्र 2019 से 2021 के बीच कई बोर्ड रेजोल्यूशंस पर परेश पारेख के डिजिटल सिग्नेचर का कथित तौर पर अनधिकृत इस्तेमाल है। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर NCLT से इस एसेट को टेकओवर करने की मंजूरी ली गई थी।
कानूनी शिकंजा और बढ़ता दबाव
यह घटनाक्रम Jaiprakash Infratech की रेजोल्यूशन प्रक्रिया के लिए बड़ी कानूनी अनिश्चितता पैदा करता है। Suraksha Realty पर दबाव सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। EOW, Suraksha Asset Reconstruction Company से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं की भी जांच कर रही है, जिसमें लोन रिकवरी में गड़बड़ी और Yes Bank के अधिकारियों के साथ पुराने संबंधों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा, 2026 की शुरुआत में दिल्ली पुलिस द्वारा अलग से FIR दर्ज किए जाने के बाद से ग्रुप की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
फिलहाल, वालिया ग्रुप की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। स्टेकहोल्डर्स के लिए अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ये कानूनी जांच JIL टेकओवर प्रोसेस को प्रभावित करती है या NCLT द्वारा मंजूर किए गए रेजोल्यूशन प्लान में कोई देरी या बदलाव होता है या नहीं।
