मुंबई की एक स्पेशल NIA कोर्ट ने एल्गार परिषद मामले में 4 एक्टिविस्टों की जमानत रद्द करने की एजेंसी की मांग को खारिज कर दिया है। अदालत का कहना है कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि इन्होंने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है।
मुंबई की स्पेशल NIA अदालत ने 29 अगस्त, 2026 को अपना फैसला सुनाते हुए पी. वरवर राव, वर्नोन गोंसाल्विस, सुधा भारद्वाज और अरुण फरेरा की जमानत बरकरार रखी है। NIA ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि इन चारों ने 19 जनवरी, 2026 को मुंबई प्रेस क्लब में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होकर अपनी जमानत की शर्तों को तोड़ा है।
कोर्ट ने क्यों खारिज की अर्जी?
अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत रद्द करना एक गंभीर न्यायिक कदम है, जिसके लिए कदाचार के ठोस और पुख्ता सबूतों की आवश्यकता होती है। NIA द्वारा पेश किए गए सीसीटीवी फुटेज में ऑडियो नहीं था, जिसके चलते अदालत इस बात से संतुष्ट नहीं हुई कि मीटिंग का उद्देश्य किसी प्रतिबंधित विचारधारा को फैलाना या अवैध संपर्क करना था।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि वे पत्रकारों और सामाजिक हस्तियों के निमंत्रण पर जेल की स्थिति और अन्य कैदियों के स्वास्थ्य पर चर्चा करने गए थे। अदालत ने माना कि केवल किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में मौजूद रहने को तब तक जमानत की शर्तों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता, जब तक कि अवैध गतिविधियों का कोई ठोस प्रमाण न हो।
भविष्य के लिए चेतावनी
हालांकि NIA की अर्जी खारिज कर दी गई है, लेकिन अदालत ने चारों को कड़ी चेतावनी दी है। न्यायाधीश ने उन्हें भविष्य में अपनी सार्वजनिक गतिविधियों और कार्यक्रमों को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है। अदालत ने जोर देकर कहा कि जो लोग जमानत पर बाहर हैं, उन्हें अपनी रिहाई की शर्तों का कड़ाई से पालन करना चाहिए ताकि कानूनी जटिलताओं से बचा जा सके। फिलहाल, इन एक्टिविस्टों की जमानत जारी रहेगी और ट्रायल की प्रक्रिया अपनी गति से आगे बढ़ती रहेगी।
