मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने Gitanjali Gems के प्रमोटर Mehul Choksi और उनकी पत्नी Preeti Choksi के खिलाफ नॉन-बेलेबल वारंट जारी किया है। यह मामला कंपनी की पब्लिक डिपॉजिट स्कीम में निवेशकों का पैसा न लौटाने से जुड़ा है।
मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने Mehul Choksi और उनकी पत्नी Preeti Choksi की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) की ओर से दायर केस में लगातार समन भेजने के बावजूद पेश न होने पर कोर्ट ने दोनों के खिलाफ नॉन-बेलेबल वारंट जारी किए हैं। यह कानूनी लड़ाई मुख्य रूप से Gitanjali Gems द्वारा चलाई गई डिपॉजिट स्कीमों के फेल होने और निवेशकों का पैसा न लौटाने को लेकर है।
क्या है 'शगुन लाभ' (Shagun Labh) विवाद?
विवाद के केंद्र में कंपनी की 'शगुन लाभ' जैसी डिपॉजिट स्कीम हैं। आरोप है कि कंपनी ने आम निवेशकों से अच्छा रिटर्न देने का वादा करके पूंजी जुटाई थी, लेकिन मैच्योरिटी पर पैसा वापस करने में पूरी तरह नाकाम रही। यह सीधे तौर पर कंपनी अधिनियम (Companies Act) के तहत नियमों का उल्लंघन है, जिसे लेकर RoC ने कड़ा रुख अपनाया है।
बैंकिंग फ्रॉड से कैसे अलग है यह मामला?
निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि यह कार्रवाई Punjab National Bank (PNB) वाले बड़े बैंकिंग फ्रॉड से अलग है। जहां बैंकिंग फ्रॉड की जांच CBI और Enforcement Directorate जैसी एजेंसियां कर रही हैं, वहीं यह केस पूरी तरह से कंपनी के रेगुलेटरी फेलियर और डिपॉजिटर्स के साथ हुए विश्वासघात पर केंद्रित है।
लंबे समय से जारी है कानूनी घेरा
2018 में Gitanjali Gems के पतन के बाद से ही कंपनी भारी जांच के घेरे में है। प्रमोटर्स पर अलग-अलग देशों में कई केस चल रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 की शुरुआत में Mehul Choksi को बेल्जियम में भी गिरफ्तारी का सामना करना पड़ा था, जो उनके खिलाफ जारी अंतरराष्ट्रीय कानूनी कार्रवाई का हिस्सा है। अब मुंबई कोर्ट का यह कदम उन्हें कानून के दायरे में लाने की एक और कोशिश है।
