Meta Platforms इस वक्त एक बड़े कानूनी दांव-पेंच के बीच फंसी हुई है। अमेरिका के 29 राज्यों ने बच्चों की सुरक्षा से जुड़े जोखिमों के आरोपों को लेकर कंपनी पर मुकदमा दायर किया है। रिपोर्टों में जहां **$1.4 ट्रिलियन** के भारी-भरकम हर्जाने का जिक्र है, वहीं कंपनी ने इसे पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। निवेशकों की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि बढ़ता कानूनी खर्च और प्लेटफॉर्म में संभावित बदलावों का कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर क्या असर पड़ेगा, जो पहले से ही दबाव में हैं।
Meta Platforms पर क्यों चला मुकदमा?
कैलिफोर्निया के ओकलैंड में Meta Platforms एक ऐतिहासिक मुकदमे का सामना कर रही है। अमेरिका के 29 राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है। इस मुकदमे का मुख्य आरोप यह है कि टेक दिग्गज कंपनी ने जानबूझकर अपने प्लेटफॉर्म्स, जैसे कि Facebook और Instagram, को युवा यूज़र्स के लिए एडिक्टिव (लत लगने वाला) बनाया है। राज्यों का दावा है कि इन डिज़ाइन से बच्चों को नुकसान हुआ है और कंपनी ने अपनी सेवाओं की सुरक्षा को लेकर जनता को गुमराह किया है। हालांकि, कोर्ट में $1.4 ट्रिलियन के नुकसान का एक अनुमानित आंकड़ा सामने आया है, Meta ने इसे 'बेतुका' और 'मनगढ़ंत' बताकर खारिज कर दिया है, यह स्पष्ट करते हुए कि यह कोई औपचारिक कानूनी मांग नहीं है।
निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
इस मुकदमे का नतीजा निवेशकों के लिए बहुत मायने रखता है, क्योंकि इसका Meta के बिजनेस मॉडल पर गहरा असर पड़ सकता है। राज्य सरकारें कोर्ट से ऐप्स में स्ट्रक्चरल बदलाव की मांग कर रही हैं, जैसे कि 18 साल से कम उम्र के यूज़र्स के लिए इनफिनिट स्क्रॉलिंग, ऑटो-प्लेइंग वीडियो और कुछ एलगोरिदमिक फीचर्स को हटाना। अगर कोर्ट इन बदलावों का आदेश देता है, तो यह युवा यूज़र्स के प्लेटफॉर्म के साथ इंटरैक्ट करने के तरीके को बदल सकता है, जिसका सीधा असर विज्ञापन रेवेन्यू पर पड़ सकता है, जो कंपनी की आय का मुख्य स्रोत है।
वित्तीय प्रदर्शन पर दबाव
वित्तीय प्रदर्शन पहले से ही निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। 2026 की दूसरी तिमाही के नतीजों में, Meta ने $60.8 बिलियन का रेवेन्यू दर्ज किया था। हालांकि, इसके ऑपरेटिंग मार्जिन गिरकर 31% पर आ गए, जो पिछले साल इसी अवधि में 43% थे। इस गिरावट का एक बड़ा कारण कानूनी सेटलमेंट से जुड़ा $2.4 बिलियन का एक-मुश्त चार्ज है, साथ ही AI इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर भारी खर्च भी। यह दिखाता है कि कैसे कानूनी खर्च और टेक्नोलॉजी में निवेश कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी पर लगातार दबाव बना रहे हैं।
लगातार कानूनी झटके
यह मुकदमा कोई अकेली घटना नहीं है। 2026 की शुरुआत में, न्यू मैक्सिको के एक जज ने Meta को एक अलग मामले में $567 मिलियन का भुगतान करने का आदेश दिया था, जिसका कंपनी फिलहाल अपील कर रही है। इसके अलावा, लॉस एंजिल्स की एक जूरी ने हाल ही में एक अन्य मामले में कंपनी को नेग्लिजेंट डिज़ाइन के लिए उत्तरदायी ठहराया था, जिसे कंपनी चुनौती देने का इरादा रखती है। इन लगातार कानूनी लड़ाइयों से संकेत मिलता है कि अमेरिका में कंपनी को रेगुलेटरी और जुडिशियल जांच का सामना करना पड़ रहा है।
आगे क्या?
निवेशकों के लिए तत्काल ध्यान सिर्फ संभावित हर्जाने पर नहीं है, बल्कि ऑपरेशनल खर्चों और प्लेटफॉर्म में होने वाले बदलावों पर भी है। CEO मार्क ज़करबर्ग सहित कंपनी के एग्जीक्यूटिव्स को भी इस सुनवाई के दौरान गवाही देनी पड़ सकती है, जो कई हफ्तों तक चलने की उम्मीद है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी इन रेगुलेटरी मांगों को पूरा करते हुए अपने विज्ञापन एंगेजमेंट मेट्रिक्स को कैसे बनाए रखती है, और क्या कानूनी खर्चे ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव बनाए रखेंगे।
