मराठा आरक्षण कार्यकर्ता Manoj Jarange Patil की भूख हड़ताल का आज 19वां दिन है। उनकी नाजुक सेहत और गणेशोत्सव के दौरान मुंबई पुलिस द्वारा आजाद मैदान में प्रदर्शन की अनुमति न दिए जाने से आंदोलन पर बड़ा संकट मंडरा रहा है।
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे मनोज जरांगे पाटिल का संघर्ष एक बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच चुका है। उनके अनशन का 19वां दिन है और मेडिकल रिपोर्ट में उनके शरीर में पानी की कमी (dehydration), लो ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल गिरने की गंभीर चेतावनी दी गई है। डॉक्टरों की टीम ने उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी है, जिससे उनके मुंबई पहुंचने के इरादों पर सवालिया निशान लग गया है।
कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियां
मुंबई पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए आजाद मैदान में प्रस्तावित अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है। चूंकि इस समय मुंबई में गणेशोत्सव का त्योहार चल रहा है, ऐसे में प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। पुलिस का मानना है कि इस पीक सीजन के दौरान प्रदर्शन से यातायात, रिटेल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
सरकार का क्या है रुख?
महाराष्ट्र सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों की 13 में से 12 कानूनी रूप से जायज मांगों को पहले ही स्वीकार कर लिया गया है। सरकार का तर्क है कि बची हुई एक मांग संवैधानिक और कानूनी जटिलताओं से जुड़ी है, जिसके लिए समय चाहिए। प्रशासन ने आंदोलनकारियों से त्योहार के दौरान आम जनता की सुविधा का ध्यान रखने की अपील की है।
आने वाले दिनों में आंदोलन का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का क्या नतीजा निकलता है और कार्यकर्ता की गिरती सेहत के बीच आगे की रणनीति क्या होगी।
