महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने साल 1989 में Navajbai Ratan Tata Trust के भीतर हुए शेयर ट्रांसफर को वैध करार दिया है। इस फैसले ने दशकों पुराने विवाद को तो सुलझा दिया है, लेकिन Ratan Tata की हालिया वसीयत (Bequest) को लेकर नए कानूनी सवाल खड़े कर दिए हैं।
महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर अमोघ कलोती ने साल 1989 में Navajbai Ratan Tata Trust के शेयरों के हस्तांतरण को पूरी तरह वैध माना है। यह फैसला टाटा ट्रस्ट के वाइस-चेयरमैन विजय सिंह द्वारा जून 2026 में दायर उस शिकायत के बाद आया है, जिसमें उन्होंने Naval H. Tata को किए गए शेयर ट्रांसफर पर सवाल उठाए थे। रेगुलेटर ने साफ किया कि वह लेनदेन उस समय के सभी टैक्स नियमों के दायरे में था और पूरी प्रक्रिया उचित थी।
नई कानूनी उलझन
जांच में एक महत्वपूर्ण बात सामने आई है कि 1989 के इस ट्रांसफर में शर्त थी कि शेयर केवल Naval Tata के परिवार के पास ही रहेंगे। अब यही शर्त टाटा ग्रुप के लिए मुसीबत बन सकती है। कमिश्नर ने इशारा किया है कि यदि ट्रस्टी चाहें, तो वे कानूनी कदम उठा सकते हैं क्योंकि दिवंगत Ratan Tata द्वारा इन शेयरों को Ratan Tata Endowment Foundation (RTEF) और Ratan Tata Education Trust (RTET) जैसी बाहरी चैरिटेबल संस्थाओं को दान करना पुरानी शर्त का उल्लंघन हो सकता है।
आंतरिक कलह का खुलासा
रेगुलेटर के आदेश से टाटा ग्रुप के भीतर की खींचतान भी जगजाहिर हो गई है। कमिश्नर ने विजय सिंह के व्यवहार पर भी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि बोर्ड द्वारा ट्रस्ट का बचाव करने का फैसला लिए जाने के बावजूद, विजय सिंह ने बोर्ड को सूचित किए बिना जांच की मांग की, जो एक ट्रस्टी की जिम्मेदारी के अनुरूप नहीं है। हालांकि, उनके खिलाफ कोई औपचारिक कार्रवाई नहीं हुई है, लेकिन इस टिप्पणी का असर भविष्य की नियुक्तियों पर पड़ सकता है।
विजय सिंह, जो पूर्व केंद्रीय रक्षा सचिव भी रह चुके हैं, अगस्त 2026 में Sir Ratan Tata Trust के अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। फिलहाल टाटा ट्रस्ट ने इस फैसले का स्वागत करते हुए आरोपों को बेबुनियाद बताया है, लेकिन निवेशकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या ट्रस्टी अपनी संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर कोई नया कानूनी विवाद खड़ा करेंगे।
