Maharashtra Food and Drugs Administration ने बॉम्बे हाईकोर्ट में FSSAI के साल 2023 के निर्देश को चुनौती दी है। यह मामला बड़ी FMCG और फूड चेन कंपनियों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है, क्योंकि अब स्टेट इंस्पेक्टर भी सेंट्रल लाइसेंस वाली कंपनियों की ऑडिट कर पाएंगे या नहीं, इस पर फैसला **26 नवंबर** को होगा।
कानूनी विवाद की जड़
महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के 2023 के उस सर्कुलर को कानूनी चुनौती दी है, जो राज्य के अधिकारियों को सेंट्रल लाइसेंस वाली कंपनियों की जांच करने से रोकता है। यह विवाद 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006' के तहत तय किए गए प्रशासनिक अधिकारों को लेकर है।
क्या है FoSCoS का पेंच?
विवाद का मुख्य केंद्र FSSAI का डिजिटल प्लेटफॉर्म 'फूड सेफ्टी कंप्लायंस सिस्टम' (FoSCoS) है। महाराष्ट्र FDA का आरोप है कि यह प्लेटफॉर्म कंपनियों को सेंट्रल लाइसेंस लेने के लिए प्रेरित करता है, जिससे वे स्थानीय निरीक्षकों (State Inspectors) की पहुंच से बाहर हो जाती हैं। राज्य का तर्क है कि इससे स्थानीय अधिकारियों की भूमिका कमजोर हो रही है, जो अब तक मैन्युफैक्चरिंग साइट्स और सुरक्षा मानकों की निगरानी करते आए हैं।
निवेशकों पर क्या होगा असर?
अगर अदालत का फैसला राज्य के पक्ष में आता है, तो बड़ी FMCG और फूड कंपनियों को 'दोहरी निगरानी' (Dual Oversight) का सामना करना पड़ सकता है। इसका मतलब है:
- बढ़ी हुई जटिलता: कंपनियों को सेंट्रल और स्टेट दोनों रेगुलेटर्स के जवाब देने पड़ सकते हैं।
- ऑडिट का दबाव: जांच और ऑडिट की संख्या बढ़ सकती है, जिससे कामकाज में बाधा आ सकती है।
- अनुपालन का संकट: अलग-अलग रेगुलेटर्स के दिशानिर्देशों में तालमेल न होने से कंपनियों के लिए 'कंप्लायंस' करना मुश्किल होगा।
फिलहाल, मार्केट की नजरें 26 नवंबर पर टिकी हैं, जब बॉम्बे हाईकोर्ट इस मामले में सुनवाई करेगा। यह देखना अहम होगा कि अदालत क्या कोई अंतरिम आदेश जारी करती है या मौजूदा सेंट्रल कंट्रोल को ही बरकरार रखती है।
