महाराष्ट्र सरकार ने Bombay High Court में हलफनामा दायर कर 2025 के Public Security Act का बचाव किया है। सरकार का तर्क है कि राज्य में मौजूद 64 माओवादी संगठनों को खत्म करने और केंद्र से फंड हासिल करने के लिए यह कानून बेहद जरूरी है।
कानूनी लड़ाई और सरकार का पक्ष
6 अक्टूबर, 2026 को महाराष्ट्र सरकार ने Bombay High Court में एक औपचारिक हलफनामा पेश किया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि Maharashtra Special Public Security Act, 2025 न केवल सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनिवार्य है, बल्कि यह केंद्र सरकार के 2020 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप भी है। सरकार ने दावा किया है कि राज्य में 64 माओवादी फ्रंट संगठन सक्रिय हैं, जो देश में सबसे अधिक है।
फंडिंग और SRE स्कीम का लिंक
इस मामले का एक बड़ा आर्थिक पहलू भी है। यह कानून केंद्र की Security Related Expenditure (SRE) स्कीम के तहत फंड प्राप्त करने की शर्त है। यह पैसा राज्य के लिए काउंटर-इंसर्जेंसी ऑपरेशंस और इन्फ्रास्ट्रक्चर जरूरतों को पूरा करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
विपक्ष की आपत्तियां
इस कानून को Indian National Congress, Communist Party of India (CPI) और All India Trade Union Congress (AITUC) ने चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि यह एक्ट सरकार को असीमित शक्तियां देता है, जिससे बिना पर्याप्त न्यायिक समीक्षा के संगठनों को बैन करने और संपत्ति जब्त करने का जोखिम बढ़ गया है।
सरकार की दलील
सरकार का कहना है कि यह कानून पूरी तरह पारदर्शी है। इसे राष्ट्रपति की मंजूरी दिसंबर 2025 में मिली थी, इससे पहले एक संयुक्त समिति ने 15,000 से ज्यादा आपत्तियों पर विचार किया था। फिलहाल, राज्य ने हाई कोर्ट से इन याचिकाओं को खारिज करने की मांग की है। अब निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों की नजरें कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, क्योंकि इसका असर राज्य की वित्तीय स्थिति और सार्वजनिक सुरक्षा कानूनों के भविष्य पर पड़ सकता है।
