Maharashtra Charity Commissioner ने Tata Trusts से जुड़ी गवर्नेंस आपत्तियों पर सुनवाई को **15 अक्टूबर, 2026** तक टाल दिया है। यह देरी पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री की कानूनी चुनौतियों का जवाब देने के लिए दी गई है।
कानूनी विवाद और नई तारीख
महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने Tata Trusts के खिलाफ गवर्नेंस आपत्तियों पर चल रही सुनवाई को 15 अक्टूबर, 2026 के लिए स्थगित कर दिया है। ट्रस्ट के प्रतिनिधियों ने प्रशासनिक बदलावों का हवाला देते हुए समय मांगा था, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। इस पूरे मामले की जड़ में 'चेंज रिपोर्ट्स' हैं, जिसे पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने चुनौती दी है। मिस्त्री ने ट्रस्ट की पारदर्शिता और बोर्ड के कामकाज के तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
Tata Group पर असर
यह कानूनी लड़ाई केवल ट्रस्ट तक सीमित नहीं है, क्योंकि Sir Ratan Tata Trust और Sir Dorabji Tata Trust मिलकर Tata Sons की करीब 51.54% हिस्सेदारी संभालते हैं। पूरे Tata Trusts नेटवर्क का Tata Sons में कुल हिस्सा लगभग 66% है।
वर्तमान में, Sir Ratan Tata Trust पर रेगुलेटरी पाबंदियों के कारण बोर्ड मीटिंग्स नहीं हो पा रही हैं। इस गवर्नेंस डेडलॉक (Governance Deadlock) ने Tata Sons के चेयरमैन पद के सक्सेशन और सालाना आम बैठकों (AGM) में होने वाले फैसलों को लटका दिया है।
थोड़ी राहत की खबर
हालांकि, ट्रस्ट के लिए राहत की बात यह है कि 2 सितंबर, 2026 को चैरिटी कमिश्नर ने 1989 के शेयर ट्रांसफर मामले से जुड़ी एक पुरानी शिकायत को खारिज कर दिया, जिससे ट्रस्ट को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अब बाजार की नजरें 15 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह देखना होगा कि क्या बोर्ड मीटिंग्स पर लगी रोक हटाई जाती है या नहीं।
