Mahadev Betting App: दुबई में गिरफ्तार हुआ रवि उप्पल, क्या स्मॉल-कैप स्टॉक्स में हुई थी हेरफेर?

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Mahadev Betting App: दुबई में गिरफ्तार हुआ रवि उप्पल, क्या स्मॉल-कैप स्टॉक्स में हुई थी हेरफेर?

Mahadev Betting App के को-प्रमोटर रवि उप्पल को दुबई में गिरफ्तार कर लिया गया है। यह कार्रवाई इंटरपोल के नोटिस के बाद हुई है। दिलचस्प बात यह है कि इस सिंडिकेट की अवैध कमाई का इस्तेमाल कथित तौर पर कुछ स्मॉल-कैप शेयरों के भाव को मैनिपुलेट करने में किए जाने के संकेत मिले हैं।

Mahadev ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म के मुख्य चेहरों में से एक, रवि उप्पल को दुबई में हिरासत में ले लिया गया है। यह घटनाक्रम भारतीय जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। इससे पहले, उनके सहयोगी सौरभ चंद्राकर को 1 नवंबर, 2026 को ओमान से भारत लाया गया था।

मार्केट पर असर और रेगुलेटरी जांच

भले ही Mahadev बेटिंग प्लेटफॉर्म कोई लिस्टेड कंपनी नहीं है, लेकिन इसकी जांच का असर फाइनेंशियल मार्केट पर गहरा पड़ रहा है। एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) और सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) लगातार इस सिंडिकेट के फाइनेंशियल नेटवर्क को ट्रैक कर रही हैं। जांच में यह सामने आया है कि कैसे हवाला और शेल कंपनियों के जरिए पैसों का हेरफेर किया गया।

सबसे अहम बात यह है कि एजेंसियों को संदेह है कि बेटिंग से हुई काली कमाई को शेयर बाजार में झोंका गया था। आरोप हैं कि इस पैसे का इस्तेमाल कुछ चुनिंदा स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (SMEs) के स्टॉक्स के भाव को मैनिपुलेट करने में किया गया। इसी कारण अब उन ट्रेडिंग एंटिटीज और फाइनेंशियल अकाउंट्स की गहन जांच की जा रही है, जो इस पैसे की हेराफेरी में शामिल हो सकते हैं।

कानूनी जोखिम और निवेशकों के लिए सीख

इन्वेस्टिगेटिव एजेंसियां अक्सर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में संदिग्ध अकाउंट्स और डीमैट अकाउंट्स को फ्रीज करने का आदेश देती हैं। यदि कोई निवेशक या कंपनी अनजाने में भी ऐसे संदिग्ध नेटवर्क के साथ जुड़ी पाई जाती है, तो उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

फिलहाल, भारतीय अधिकारी राजनयिक चैनलों के जरिए रवि उप्पल के प्रत्यर्पण (Extradition) की प्रक्रिया को अंतिम रूप दे रहे हैं। जैसे-जैसे इस नेटवर्क की परतें खुल रही हैं, मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में और भी कई नाम सामने आ सकते हैं, जिससे कुछ इंटरमीडियरीज पर रेगुलेटरी शिकंजा कस सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.