MahaRERA ने पुणे के वाघोली प्रोजेक्ट में देरी के लिए बिल्डर की दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया है। रेगुलेटर ने साफ कहा है कि प्रशासनिक बदलाव का बहाना बनाकर देरी को जायज नहीं ठहराया जा सकता और बिल्डर को खरीदार को ब्याज देना होगा।
प्रशासनिक बदलाव का बहाना नहीं चलेगा
महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (MahaRERA) ने पुणे हाउसिंग सेक्टर के लिए एक कड़ा संदेश दिया है। 8 सितंबर 2026 के एक आदेश में, अथॉरिटी ने उस बिल्डर को फटकार लगाई है जिसने पुणे म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (PMC) और पुणे मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (PMRDA) के बीच प्रशासनिक उलझन का हवाला देकर फ्लैट हैंडओवर में देरी की थी।
रेगुलेटर ने पाया कि प्रोजेक्ट के प्लान जनवरी 2022 में अप्रूव हुए थे, जबकि उस समय वह इलाका पहले ही PMC के अधिकार क्षेत्र में आ चुका था। चूंकि एग्रीमेंट सितंबर 2022 में हुआ था, इसलिए बिल्डर का यह तर्क कि प्रशासनिक बदलाव के कारण देरी हुई, कानूनी रूप से टिक नहीं पाया।
खरीदार को कितना मिलेगा मुआवजा?
Real Estate (Regulation and Development) Act की धारा 18 के तहत, अथॉरिटी ने बिल्डर को खरीदार को मुआवजा देने का निर्देश दिया है। खरीदार ने कुल ₹41.85 लाख में से ₹39.15 लाख का भुगतान पहले ही कर दिया था। अब बिल्डर को 1 जनवरी 2025 से SBI की MCLR दर में 2% जोड़कर ब्याज का भुगतान करना होगा। खरीदार को यह छूट भी दी गई है कि वह बकाया राशि में इस ब्याज को एडजस्ट कर सकता है।
बिल्डर्स की जवाबदेही बढ़ी
यह फैसला साफ करता है कि बिल्डर अब सरकारी प्रक्रिया या प्रशासनिक फेरबदल की आड़ में अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। इस आदेश के बाद अब बिल्डर्स को अपने प्रोजेक्ट टाइमलाइन को लेकर और अधिक सावधान रहना होगा, क्योंकि भविष्य में ऐसी किसी भी लापरवाही पर उन्हें धारा 40 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई या रिकवरी वारंट का सामना करना पड़ सकता है।
