Maharashtra Real Estate Appellate Tribunal ने बिल्डर्स द्वारा मनमाने ढंग से वसूले जाने वाले कैंसिलेशन चार्ज पर रोक लगा दी है। **₹1.15 करोड़** से ज्यादा के रिफंड मामले में कोर्ट ने साफ किया कि RERA और MOFA कानून प्राइवेट एग्रीमेंट से ऊपर हैं।
बिल्डर्स की मनमानी का अंत
MahaREAT का यह फैसला रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक बड़ा नजीर (Precedent) बन गया है। हाल ही में एक केस में ट्रिब्यूनल ने बिल्डर को होमबॉयर को ₹1.15 करोड़ से ज्यादा की रकम रिफंड करने का आदेश दिया। मामला 2015 में मुंबई में दो फ्लैट बुक करने से जुड़ा था, जिसे पजेशन में देरी के कारण कैंसल किया गया था।
क्या थी बिल्डर की चालाकी?
बिल्डर ने 'Clause 12' का हवाला देकर फ्लैट की कुल कीमत का 10% जुर्माना काटने और 18% सालाना ब्याज वसूलने की कोशिश की थी। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने पाया कि बिल्डर ने महाराष्ट्र ओनरशिप ऑफ फ्लैट्स एक्ट (MOFA) की धारा 4(1) का उल्लंघन करते हुए कोई फॉर्मल एग्रीमेंट नहीं किया था। कोर्ट ने साफ कहा कि जब बिल्डर ने खुद कानूनी औपचारिकताएं पूरी नहीं कीं, तो वे अपने मनमाने एग्रीमेंट को लागू नहीं कर सकते।
अब क्या हैं नए नियम?
MahaRERA ऑर्डर नंबर 60/2024 के तहत अब एक स्टैंडडाइज्ड अलॉटमेंट लेटर अनिवार्य है। नए दिशानिर्देशों के अनुसार:
- कैंसिलेशन फीस अब 2% से ज्यादा नहीं हो सकती (61 दिनों के बाद के रिक्वेस्ट के लिए)।
- RERA कानून किसी भी प्राइवेट एग्रीमेंट से ऊपर माना जाएगा।
यह फैसला उन सभी होमबॉयर्स के लिए एक बड़ी जीत है जो बिल्डर्स के भारी-भरकम पेनल्टी क्लॉज में फंस जाते थे। भविष्य में, डेवलपर्स को अब पजेशन में देरी और एग्रीमेंट की शर्तों को लेकर और भी ज्यादा सतर्क रहना होगा।
