Gem Veeramani Case: मद्रास हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, केस से जुड़े वीडियो शेयर करने पर लगी रोक

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AuthorMehul Desai|Published at:
Gem Veeramani Case: मद्रास हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, केस से जुड़े वीडियो शेयर करने पर लगी रोक

मद्रास हाईकोर्ट ने औद्योगिक घराने के Gem Veeramani से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में मीडिया और सोशल मीडिया पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने नाबालिग पीड़ितों की पहचान बचाने और मीडिया ट्रायल रोकने के लिए वीडियो प्रसारित करने पर बैन लगा दिया है।

मद्रास हाईकोर्ट ने चेन्नई के उद्योगपति Gem Veeramani से जुड़े आपराधिक मामले में वीडियो और दृश्य सामग्री के प्रसारण पर कड़ी रोक लगा दी है। जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन की बेंच ने यह आदेश मुख्यधारा के मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए जारी किया है, ताकि जांच के दौरान सामने आए नाबालिग पीड़ितों की पहचान सुरक्षित रहे। यह निर्देश 'थुलिर फाउंडेशन' द्वारा दायर एक याचिका के बाद आया है, जिसमें मामले की कवरेज को लेकर गंभीर चिंताएं जताई गई थीं।

मीडिया ट्रायल पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

अदालत का मानना है कि 'मीडिया ट्रायल' न केवल कानूनी प्रक्रिया में बाधा डालते हैं, बल्कि पीड़ितों को न्याय मांगने से भी हतोत्साहित करते हैं। बेंच ने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब यह नहीं है कि जांच को प्रभावित करने वाली खबरें बिना सोचे-समझे दिखाई जाएं। टीआरपी (TRP) की दौड़ में व्यक्तिगत गरिमा और सुरक्षा को ताक पर नहीं रखा जा सकता।

अब कैसे मिलेगी जानकारी?

पारदर्शिता और जांच की निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए, कोर्ट ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे हर हफ्ते केस का औपचारिक और कलेक्टिव स्टेटस अपडेट दें। इसका उद्देश्य अफवाहों और लीक हुई सामग्री के बजाय आधिकारिक और सत्यापित जानकारी को जनता तक पहुँचाना है।

साथ ही, अदालत ने उन फुटेज के स्रोत की जांच के भी आदेश दिए हैं जो पहले लीक हुए थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि गोपनीय साक्ष्य केवल जांच प्रक्रिया का हिस्सा होने चाहिए। इस मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी, जिसमें स्टेटस रिपोर्ट और जांच की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

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