Madras HC का एक्शन: तमिलनाडु सरकार से मांगा रिपोर्ट, लॉ ऑफिसर नियुक्ति में राजनीतिक दखल का आरोप

LAWCOURT
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AuthorMehul Desai|Published at:
Madras HC का एक्शन: तमिलनाडु सरकार से मांगा रिपोर्ट, लॉ ऑफिसर नियुक्ति में राजनीतिक दखल का आरोप
Overview

मदुरै बेंच, मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से राज्य के लॉ ऑफिसर्स की नियुक्ति में कथित राजनीतिक प्रभाव को लेकर दायर एक याचिका पर स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट इस बात की जांच कर रहा है कि क्या इन पदों के लिए AICC की सूची का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे प्रक्रियात्मक पारदर्शिता और योग्यता-आधारित शासन पर सवाल उठ रहे हैं।

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क्या हुआ?

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने तमिलनाडु सरकार को एक जनहित याचिका (PIL) के जवाब में औपचारिक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। वकील सी. सेलवाकुमार द्वारा दायर इस याचिका में लॉ ऑफिसर्स की नियुक्ति की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य के वकील के पदों के लिए उम्मीदवारों के चयन में बाहरी राजनीतिक प्रभाव, विशेष रूप से ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) का इस्तेमाल किया जा रहा है।

शासन की पारदर्शिता क्यों ज़रूरी है?

राज्य के प्रशासनिक माहौल पर नज़र रखने वालों के लिए, कानूनी नियुक्तियों की निष्ठा बहुत महत्वपूर्ण है। लॉ ऑफिसर्स अदालतों में सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं, और सार्वजनिक संस्थानों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे सुनिश्चित करें कि ये नियुक्तियाँ योग्यता पर आधारित हों और स्थापित कानूनी दिशानिर्देशों का पालन करें। याचिकाकर्ता का तर्क है कि बाहरी सिफारिशों पर निर्भर रहना मद्रास हाई कोर्ट और मदुरै बेंच के लॉ ऑफिसर्स (नियुक्ति) नियम, 2017 को दरकिनार करता है।

कानूनी चुनौती

याचिकाकर्ता ने अदालत का ध्यान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक दस्तावेज़ की ओर खींचा है, जिसमें कथित तौर पर AICC द्वारा अतिरिक्त महाधिवक्ता, स्थायी वकील और सरकारी वकील सहित विभिन्न भूमिकाओं के लिए 181 वकीलों की सिफारिश की गई है। याचिका में कहा गया है कि ऐसी बाहरी सूचियों पर विचार करना पारदर्शिता के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। इसमें सार्वजनिक नियुक्तियों में योग्यता के आधार पर होने वाली प्रक्रियाओं के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के 'ममता मोहंती बनाम उड़ीसा राज्य' मामले के निर्देश का भी हवाला दिया गया है।

हालिया नियुक्तियों का संदर्भ

यह याचिका राज्य द्वारा मई 2026 में की गई कई अस्थायी नियुक्तियों के बाद दायर की गई है। इनमें वरिष्ठ वकील पी.वी. बालासुब्रमण्यम और टी. गौथमैन को अतिरिक्त महाधिवक्ता के रूप में, और वरिष्ठ वकील आर. जॉन सत्यान को आपराधिक पक्ष में अस्थायी वकील के तौर पर नियुक्त करना शामिल है। साथ ही, नागरिक पक्ष के लिए 17 अस्थायी वकील भी 26 मई को नियुक्त किए गए थे। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इस कानूनी चुनौती के लंबित रहते आगे की भर्ती प्रक्रिया जारी रखने से तीसरे पक्ष के अधिकार बन सकते हैं और न्यायिक समीक्षा प्रक्रिया जटिल हो सकती है।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

सबसे महत्वपूर्ण बात राज्य सरकार से आने वाली स्टेटस रिपोर्ट है। अदालत की इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया और उसके बाद के आदेश, राज्य द्वारा 2017 के नियुक्ति नियमों के पालन पर स्पष्टता प्रदान करेंगे। यह देखा जाएगा कि चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और योग्यता-आधारित बरकरार रखा जाता है या नहीं, क्योंकि यह राज्य-स्तरीय प्रशासनिक निकायों के भीतर स्थिरता और शासन मानकों को दर्शाता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.