मध्य प्रदेश पुलिस ने नरसिंहपुर में एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसमें करीब **₹80 लाख** की हेराफेरी का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस सिलसिले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह टेलीग्राम के जरिए निवेश पर दोगुना मुनाफे का लालच देकर लोगों को ठगता था और फिर मल्टी-स्टेट्स में ठगी के पैसे को खपाने के लिए 'म्यूल' बैंक खातों का इस्तेमाल करता था। यह मामला डिजिटल लेनदेन में बढ़ते खतरों और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए बैंकिंग चैनलों के दुरुपयोग को उजागर करता है।
कैसे हुआ पर्दाफाश?
मध्य प्रदेश पुलिस ने नरसिंहपुर जिले से संचालित हो रहे एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क का सफाया कर दिया है। डिजिटल वित्तीय अपराधों के खिलाफ चल रही कार्रवाई में यह एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। पुलिस ने शुभम पटेल, नीरज पटेल, कैलाश रजक और हीरालाल रजक नाम के चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इन पर करीब ₹80 लाख के अवैध लेनदेन का आरोप है।
कहां-कहां फैला था जाल?
यह गिरोह दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, राजस्थान सहित कई राज्यों के पीड़ितों से जुड़ा हुआ है। अब तक ऐसे करीब 50 साइबर ठगी के मामले सामने आए हैं। जांच तब शुरू हुई जब छतरपुर जिले के एक पीड़ित ने ₹28 लाख गंवाने की शिकायत दर्ज कराई। आरोपियों ने पीड़ित को टेलीग्राम पर ऑनलाइन टास्क करने और रेटिंग बढ़ाने के बदले पैसे दोगुना करने का झांसा दिया था।
'म्यूल' खातों का खेल
गिरोह का मुख्य हथियार 'म्यूल' बैंक खाते थे। ये असल में लोगों के बैंक खाते होते हैं, जिन्हें किराए पर लेकर अपराधी ठगी की रकम को इधर-उधर करने और साफ करने के लिए इस्तेमाल करते थे। पुलिस के मुताबिक, गिरोह इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर लोगों से संपर्क कर उनके बैंक खातों को किराए पर लेता था। ठगी की रकम इन खातों में जमा होते ही, उसे तुरंत कई खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था और फिर आखिर में क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया जाता था। क्रिप्टोकरेंसी में बदलने से पैसों की रिकवरी और मुश्किल हो जाती है, क्योंकि इसे ट्रैक करना सामान्य बैंकिंग ट्रांसफर से कहीं ज्यादा कठिन है।
क्या कार्रवाई हुई?
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों से जुड़े करीब ₹1.5 लाख की राशि फ्रीज कर दी है। साथ ही, मौके से मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड और नकदी भी जब्त की गई है।
आगे क्या?
यह मामला 'म्यूल' खातों के बढ़ते खतरे को दर्शाता है। बैंक और रेगुलेटर्स के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि कैसे KYC (Know Your Customer) के तहत खुले खातों का दुरुपयोग रोका जाए। जैसे-जैसे अपराधी चोरी के पैसों को छिपाने के लिए बैंकिंग चैनलों का इस्तेमाल कर रहे हैं, यह मामला व्यक्तिगत वित्तीय जानकारी को सुरक्षित रखने की जरूरत पर जोर देता है। पुलिस की जांच जारी है और वे ठगी गई पूरी रकम का पता लगाने और इस बड़े नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान करने में जुटे हैं।
