मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने Associated Alcohols and Breweries Limited के व्हिस्की और रम की बिक्री पर लगे FSSAI के प्रतिबंध को फिलहाल रोक दिया है। यह अंतरिम रोक अगले सुनवाई यानी 7 सितंबर, 2026 तक प्रभावी रहेगी।
FSSAI के बैन पर मिली राहत
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने Associated Alcohols and Breweries Limited के कुछ खास तरह के व्हिस्की और रम उत्पादों की बिक्री पर FSSAI द्वारा 29 जुलाई, 2026 को लगाए गए प्रतिबंध को अंतरिम रूप से रोक दिया है। इस फैसले से कंपनी को फौरी राहत मिली है और वह 7 सितंबर, 2026 को अगली सुनवाई तक अपना कारोबार जारी रख सकेगी।
विवाद की जड़ क्या है?
यह विवाद FSSAI की एक लैब रिपोर्ट से शुरू हुआ, जिसमें कंपनी के उत्पादों में "आर्टिफिशियल फ्लेवर" और "नेचर-आइडेंटिकल फ्लेवरिंग सब्सटेंस" के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई गई थी। FSSAI का कहना था कि यह लेबलिंग मानकों का उल्लंघन है। हालांकि, कंपनी ने कोर्ट में यह दलील दी कि उसके उत्पाद मध्य प्रदेश आबकारी कानूनों का पूरी तरह पालन करते हैं, जो शराब के निर्माण में ऐसे तत्वों के इस्तेमाल की इजाजत देते हैं।
ज्यूरिसडिक्शन का मामला
इस कानूनी लड़ाई का एक अहम पहलू ज्यूरिसडिक्शन (अधिकार क्षेत्र) का है। Associated Alcohols and Breweries Limited ने शराब की लेबलिंग को रेगुलेट करने में FSSAI के अधिकार पर सवाल उठाया है। कंपनी का तर्क है कि शराब का उत्पादन और नियमन पूरी तरह से राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि FSSAI ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस (show-cause notice) जारी करने के बाद मिली प्रतिक्रिया पर पर्याप्त विचार किए बिना ही उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया था।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
यह मामला अल्कोहलिक बेवरेज सेक्टर में रेगुलेटरी जोखिमों को उजागर करता है, जहां कंपनियों को अक्सर राज्य और केंद्र सरकार के विभिन्न नियमों के बीच तालमेल बिठाना पड़ता है। कानूनी लड़ाई के अलावा, कंपनी को आंतरिक वित्तीय दबावों का भी सामना करना पड़ रहा है। जून 2026 तिमाही (Q1 FY27) में, कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 24.61% घट गया था। साथ ही, कंपनी का वर्किंग कैपिटल साइकिल बढ़कर 64.2 दिन हो गया है, जो पहले 40.3 दिन था। इससे पता चलता है कि कंपनी को मौजूदा माहौल में लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर ज्यादा ध्यान देना होगा।
7 सितंबर की सुनवाई के नतीजे अहम होंगे। यह FSSAI के अधिकार क्षेत्र की सीमाओं को स्पष्ट कर सकता है और भविष्य में ऐसे लेबलिंग विवादों को सुलझाने के लिए एक नजीर पेश कर सकता है।
