मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) को जुलाई 2026 में विधायी मंजूरी मिलने के बाद लागू किया जाएगा। इस नीति का उद्देश्य व्यक्तिगत कानूनों को मानकीकृत करना है, हालांकि इसमें आदिवासी समुदायों को छूट दी गई है। यह एक सरकारी विधायी अपडेट है और इसका शेयर बाजार या कॉर्पोरेट कंपनियों की लिस्टिंग पर सीधा असर नहीं पड़ेगा।
'आज़ादी के अमृत महोत्सव' पर सीएम का बड़ा ऐलान
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 15 अगस्त, 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य सरकार की समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की प्रतिबद्धता को दोहराया। राज्य विधानसभा द्वारा जुलाई 2026 में पारित यह कानून, राज्य भर में विवाह, तलाक और विरासत जैसे व्यक्तिगत कानूनों के लिए एक एकीकृत ढांचा स्थापित करने का प्रयास करता है।
क्या होंगे मुख्य बदलाव?
इस नए कानून के तहत, बहुविवाह पर औपचारिक प्रतिबंध लगाया जाएगा और सभी लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को अनिवार्य किया जाएगा। इस कानून की एक अहम विशेषता यह है कि आदिवासी समुदायों को विशेष छूट दी गई है, जिससे उनके मौजूदा रीति-रिवाज इन नए नियमों के दायरे से बाहर रहेंगे।
आर्थिक मोर्चे पर भी अपडेट
विधायी घोषणा के साथ ही, मुख्यमंत्री ने राज्य की आर्थिक प्रगति पर भी जानकारी दी। प्रशासन ने 2026-27 के लिए ₹4.38 लाख करोड़ का राज्य बजट पेश किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10% अधिक है। राज्य सरकार ने रोज़गार सृजन पर भी जोर दिया है और बताया है कि 'उद्यम' पोर्टल पर पंजीकृत व्यावसायिक इकाइयों के माध्यम से 33.80 लाख से अधिक रोज़गार पैदा किए गए हैं।
निवेशकों के लिए अहम बात
निवेशकों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि यह विधायी घटना कॉर्पोरेट या बाजार के घटनाक्रमों से अलग है। समान नागरिक संहिता का कार्यान्वयन राज्य की नीति और संवैधानिक कानून का मामला है। इसका सीधे तौर पर कॉर्पोरेट स्टॉक मार्केट लिस्टिंग, सेक्टर-विशिष्ट वित्तीय परिणामों या व्यक्तिगत इक्विटी मूल्यांकन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस विधायी बदलाव का NSE या BSE पर कंपनियों के प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है।
आगे क्या?
इस नीति की मुख्य निगरानी कानूनी प्रक्रिया पर रहेगी। इस तरह के विधायी परिवर्तनों को अक्सर उनकी संवैधानिक वैधता और दायरे के संबंध में न्यायिक समीक्षा से गुजरना पड़ता है। नियमों की अधिसूचना और उच्च न्यायालयों में संहिता के खिलाफ किसी भी संभावित कानूनी चुनौती की समय-सीमा राज्य सरकार के लिए अगला महत्वपूर्ण चरण होगा।
