Municipal Corporation of Delhi (MCD) ने RTI में चौंकाने वाला खुलासा किया है कि उनके पास कोई भी डिजिटल रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। यह दावा हाई कोर्ट में कही गई उनकी पिछली बातों के पूरी तरह विपरीत है, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
दिल्ली नगर निगम (MCD) अब अपनी प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर भारी मुश्किलों में घिर गई है। एक आरटीआई (RTI) जवाब में यह सामने आया है कि निगम ने अब तक अपने रिकॉर्ड्स का डिजिटलाइजेशन नहीं किया है। यह खुलासा तब हुआ है जब MCD पहले ही दिल्ली हाई कोर्ट को यह बता चुकी थी कि डिजिटलाइजेशन का काम जोरों पर है। यह विरोधाभास तब सामने आया जब Centre for Youth Culture Law and Environment (CYCLE) ने एक याचिका दायर की, जिसमें मांग की गई है कि हाउस की कार्यवाही और समितियों के फैसलों को ऑनलाइन पब्लिक पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाए।
शासन और पारदर्शिता की चुनौती
यह विवाद मुख्य रूप से 'दिल्ली म्युनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट, 1957' और 'RTI एक्ट, 2005' के बीच टकराव का है। कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की बेंच ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई है कि डिजिटल रिकॉर्ड न होने के कारण जनता और शोधकर्ताओं को जरूरी जानकारी नहीं मिल पाती। इसका उदाहरण सत्य निकेतन में हुई बिल्डिंग गिरने की घटना के समय देखने को मिला था, जहाँ लेआउट प्लान तक उपलब्ध नहीं थे।
प्रशासनिक मुश्किलें और आगे का रास्ता
निगम का कहना है कि 1957 से जमा हुए विशाल डेटा को संभालना एक बड़ी चुनौती है। संगठन के तीन भागों में बंटने और फिर दोबारा एक होने (trifurcation and reunification) के इतिहास ने फाइलों के प्रबंधन को और भी उलझा दिया है। हालांकि, फरवरी 2026 में MCD ने 'Government e-Marketplace' पोर्टल पर एक टेंडर जारी किया है, ताकि बाहरी एजेंसी के जरिए पुराने रिकॉर्ड्स को डिजिटल किया जा सके। अब सभी की नजरें इस टेंडर की प्रगति और कोर्ट की अगली कार्यवाही पर टिकी हैं कि निगम अपनी कार्यक्षमता में कैसे सुधार करता है।
