दिल्ली की NGO के तार जुड़े तेंदुए की खाल तस्करी से? MP STSF कर रही जांच

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AuthorNeha Patil|Published at:
दिल्ली की NGO के तार जुड़े तेंदुए की खाल तस्करी से? MP STSF कर रही जांच

मध्य प्रदेश में एक बड़ा अंतरराज्यीय तेंदुआ शिकार रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अब इस जांच में दिल्ली की मशहूर वाइल्डलाइफ SOS NGO भी शामिल हो गई है। आरोप है कि NGO ने अपनी प्रोफाइल बढ़ाने और फंडिंग हासिल करने के लिए जब्त की गई खालों का दिखावा किया हो सकता है। NGO के CEO को पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

एमपी STSF का बड़ा एक्शन!

मध्य प्रदेश में वन्यजीवों के खिलाफ चल रहे अवैध कारोबार पर एसटीएफ (STSF) ने एक बड़ी कार्रवाई की है। उन्होंने एक ऐसे अंतरराज्यीय तेंदुए की खाल की तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसमें नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस ऑपरेशन में वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) और उत्तर प्रदेश वन विभाग का भी सहयोग रहा।

जांच का दायरा बढ़ा, NGO पर गिरेगी गाज?

अब इस मामले की जांच दिल्ली की जानी-मानी वन्यजीव संरक्षण NGO, वाइल्डलाइफ SOS (Wildlife SOS) तक पहुँच गई है। 23 जुलाई को आगरा-ग्वालियर हाईवे पर एक ज्वाइंट ऑपरेशन में 10 तेंदुए की खालें जब्त की गईं थीं। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ के बाद, जांचकर्ताओं को इस रैकेट के तार वाइल्डलाइफ SOS से जुड़े होने का शक है। गिरफ्तार किए गए दो संदिग्धों, भगवान सिंह और वासिम, पर NGO से जुड़े होने के आरोप हैं।

क्या फंड के लिए रची गई साजिश?

सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या वाइल्डलाइफ SOS ने अपनी छवि चमकाने और ज्यादा फंडिंग जुटाने के लिए जानबूझकर ऐसी जब्तियां करवाई थीं। इस गंभीर आरोप के चलते, STSF ने वाइल्डलाइफ SOS के CEO, कार्तिक सत्यनारायण, को 17 अगस्त को शिवपुरी में पूछताछ के लिए तलब किया है। अधिकारियों द्वारा डिजिटल सबूतों और आंतरिक दस्तावेजों की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या NGO के संसाधनों का इस्तेमाल अवैध तस्करी को रोकने के बजाय, उसे बढ़ावा देने में हुआ।

दानदाताओं पर असर और आगे क्या?

यह पूरा मामला गैर-लाभकारी संस्थाओं (NGOs) के लिए एक बड़ा गवर्नेंस रिस्क (governance risk) लेकर आया है। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो इससे संस्था की प्रतिष्ठा को भारी नुकसान पहुँच सकता है और दानदाताओं का भरोसा उठ सकता है। यह घटना इस बात पर जोर देती है कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में काम करने वाले संगठनों में कितनी पारदर्शिता और कड़ी निगरानी की ज़रूरत है।

फिलहाल, STSF इस पूरे नेटवर्क का नक्शा तैयार करने में जुटी है, जिसके तार मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान तक फैले होने की आशंका है। NGO के नेतृत्व से पूछताछ के नतीजे इस मामले में अहम मोड़ साबित हो सकते हैं।

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