Byju’s की पेरेंट कंपनी Think & Learn Private Limited की इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया में एक बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। केरल पुलिस ने GLAS Trust Company LLC के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोप में केस दर्ज किया है। आरोप है कि कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स में **99.41%** वोटिंग शेयर हासिल करने के लिए जाली लेटर का सहारा लिया गया, जिससे **₹11,400 करोड़** से अधिक के दावों पर संकट मंडरा रहा है।
केरल के पलारीवट्टोम पुलिस स्टेशन में दर्ज इस मामले ने इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया को नया मोड़ दे दिया है। शिकायत के अनुसार, GLAS Trust ने अपने दावों को सही साबित करने के लिए जो ऑथोराइजेशन लेटर्स जमा किए थे, वे असल में जाली थे।
विवाद की जड़: डॉक्यूमेंट्स में हेरफेर
जांच में सामने आया है कि 25 जुलाई, 2024 के जिस लेटर को आधार बनाया गया, वह ओरिजिनल नहीं था। आरोप है कि 18 जनवरी, 2024 के पुराने लेटर के सिग्नेचर पेजों को कॉपी-पेस्ट करके इसे तैयार किया गया था। सिर्फ तारीखें और रकम बदली गई, जबकि सिग्नेचर के इमेज वही पुराने रखे गए, जिससे दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स पर असर
नियमों के मुताबिक, किसी भी रिप्रेजेंटेटिव को लेंडर्स का 50% से ज्यादा सपोर्ट मिलना जरूरी है। शिकायत का दावा है कि अगर फर्जी दस्तावेजों को हटा दिया जाए, तो GLAS Trust का सपोर्ट 95% से गिरकर सिर्फ 42% रह जाएगा। इसका मतलब है कि वे अब लेंडर्स की तरफ से फैसले लेने के योग्य नहीं रहेंगे।
21 अगस्त, 2024 तक, इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल करके ₹11,432.98 करोड़ के दावों को मान्यता मिली थी। अब यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो पूरी वोटिंग स्ट्रक्चर को फिर से रिव्यू करना पड़ेगा, जिससे इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया में भारी देरी तय है।
बता दें कि यह मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में लंबित है, जहां अक्टूबर 2024 में कोर्ट ने पुरानी क्लोजर ऑर्डर को रद्द कर दिया था। अब पुलिस की यह जांच इस जटिल कानूनी जंग में एक और बड़ी चुनौती बन गई है।
