केरल में एक जज ने अपने नाबालिग बेटे द्वारा चलाई जा रही कार से हुए जानलेवा हादसे के मामले में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए याचिका दायर की है। इस घटना में एक 55 वर्षीय स्कूटर सवार की मौत हो गई थी, जिसके बाद अब पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और मामले को डिस्ट्रिक्ट क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है।
केरल के एक जज ने राज्य हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की है। मामला उस सड़क दुर्घटना से जुड़ा है जिसमें जज की लग्जरी Mercedes-Benz कार ने एक 55 वर्षीय स्कूटर सवार जयबालकृष्णन को पीछे से टक्कर मार दी थी। अपनी याचिका में जज ने तर्क दिया है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनके नाबालिग बेटे ने गाड़ी निकाली है, और उन्हें हादसे की सूचना फोन कॉल के जरिए मिली।
पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल
राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने इस मामले को लेकर केरल विधानसभा में तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थानीय पुलिस द्वारा मामले को जिस तरह से हैंडल किया गया, उसकी जांच हो रही है। सरकार को आपत्ति है कि पुलिस ने शुरुआत में केवल जमानती धाराएं ही क्यों लगाईं। इसके अलावा, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड द्वारा आरोपी नाबालिग को जमानत दिए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं और पुलिस महानिदेशक (DGP) को जमानत रद्द कराने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है।
अब क्या है कानूनी स्थिति?
कानून के जानकारों के अनुसार, मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 199A के तहत अब जज को भी आरोपी बनाया गया है। यह कानून गाड़ी मालिक या अभिभावक को उस अपराध के लिए जवाबदेह बनाता है जो उनके नाबालिग बच्चे ने वाहन चलाते हुए किया हो। इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए अब जांच का जिम्मा डिस्ट्रिक्ट क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है। हाई कोर्ट ने पुलिस को न्यायिक अधिकारी के खिलाफ जांच आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है, और अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भविष्य में जज के खिलाफ निलंबन जैसी कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई होती है या नहीं।
