Karnataka SIT Probe: DGP Alok Kumar ने सुप्रीम कोर्ट में सरकार के CBI वाले दावे को दी चुनौती

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AuthorMehul Desai|Published at:
Karnataka SIT Probe: DGP Alok Kumar ने सुप्रीम कोर्ट में सरकार के CBI वाले दावे को दी चुनौती

कर्नाटक के DGP (प्रिजन्स) Alok Kumar ने राज्य सरकार द्वारा उन पर CBI जांच लंबित होने के दावे को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। यह विवाद KPSC भर्ती धांधली की जांच के लिए बनी SIT के गठन को प्रभावित कर रहा है।

कानूनी विवाद और SIT का भविष्य

कर्नाटक के DGP (प्रिजन्स) Alok Kumar और राज्य सरकार के बीच का कानूनी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, जिससे Karnataka Public Service Commission (KPSC) भर्ती धांधली की जांच पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह तर्क दिया था कि Alok Kumar के खिलाफ CBI जांच लंबित है, इसलिए उन्हें भर्ती घोटाले की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम (SIT) का प्रमुख नहीं बनाया जा सकता।

तथ्यों के साथ जवाब

सरकारी दावों को खारिज करते हुए, Alok Kumar ने 13 फरवरी, 2024 का CBI विशेष अदालत का आदेश पेश किया है। इस आदेश में वर्ष 2019 के फोन-टैपिंग मामले में एजेंसी की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया गया है। कुमार का तर्क है कि जब कोई सक्रिय CBI जांच ही नहीं है, तो उन्हें जांच का नेतृत्व करने से नहीं रोका जा सकता।

कोर्ट का रुख और आगे की राह

सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर, 2026 को मामले की सुनवाई के बाद अपने 1 अक्टूबर, 2026 के उस आदेश में बदलाव किया है, जिसमें SIT प्रमुख के रूप में कुमार की नियुक्ति पर रोक लगाई गई थी। अब कोर्ट ने राज्य सरकार को SIT की संरचना में बदलाव का प्रस्ताव देने की अनुमति दे दी है, जबकि SIT प्रमुख का अंतिम फैसला कर्नाटक हाई कोर्ट पर छोड़ दिया गया है।

राज्य के प्रशासनिक ढांचे पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कानूनी टकराव से KPSC भर्ती जैसे संवेदनशील मामलों की जांच में देरी होना तय है। अब सबकी निगाहें कर्नाटक हाई कोर्ट की आगामी कार्यवाही पर टिकी हैं, जो SIT के नेतृत्व और उसकी कार्यप्रणाली पर अंतिम मुहर लगाएगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.