कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने विधानसभा में स्पष्ट किया है कि पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना से जुड़े हालिया जेल छापे एक नियमित सुरक्षा अभियान थे। राज्य सरकार ने किसी खास व्यक्ति को निशाना बनाने के दावों को खारिज कर दिया है, जबकि पारप्पना अग्रहारा जेल में हुई तलाशी के दौरान जब्त की गई अवैध वस्तुओं की जांच जारी है।
जेल में रेड पर मंत्री का जवाब
मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने विधानसभा में पारप्पना अग्रहारा जेल में हाल ही में हुई तलाशी अभियान के संबंध में एक औपचारिक बयान दिया। मंत्री ने पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना के जेल सेल पर हुई रेड को किसी को 'निशाना साधने' की कार्रवाई मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह राज्य के नियमित सुरक्षा उपायों का हिस्सा था।
सीएम की मंजूरी से हुई कार्रवाई
मंत्री खड़गे ने यह भी पुष्टि की कि यह तलाशी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की आवश्यक मंजूरी के बाद ही की गई थी। उन्होंने बताया कि यह अभियान जेल के भीतर संभावित उल्लंघनों के संबंध में मिली खुफिया जानकारी के आधार पर चलाया गया था और इसका उद्देश्य किसी विशिष्ट व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं था। सरकार का कहना है कि कैदियों के प्रबंधन के लिए प्रशासनिक प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है, जिसमें सुरक्षा उद्देश्यों के लिए कैदियों को पहचान संख्या दी जाती है, न कि उनकी स्थिति के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
क्या-क्या हुआ जब्त?
इस तलाशी के दौरान, जो 11 अगस्त को हुई, एक मोबाइल फोन, चार्जर, डायरी और एक स्टोरेज डिवाइस सहित कई अवैध वस्तुएं बरामद हुईं। इसके बाद, पारप्पना अग्रहारा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। सरकार ने जेल कर्मचारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की है, जिसके परिणामस्वरूप कथित तौर पर कर्तव्य की उपेक्षा के लिए एक सहायक अधीक्षक, एक जेलर और एक वार्डन को निलंबित कर दिया गया है। बेंगलुरु सेंट्रल जेल के अधीक्षक को भी एक कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
जांच जारी
हालांकि जब्त किए गए उपकरणों से मिली जानकारी की प्रकृति के बारे में रिपोर्टें सामने आई हैं, मंत्री खड़गे ने कहा कि मोबाइल फोन और अन्य वस्तुएं फिलहाल पुलिस की हिरासत में हैं और उनकी फॉरेंसिक जांच अभी बाकी है। सरकार ने पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) को यह जांच करने का काम सौंपा है कि निषिद्ध वस्तुएं उच्च-सुरक्षा क्षेत्र में कैसे पहुंचीं। इस मामले में अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है।
यह घटना कर्नाटक राज्य के भीतर प्रशासनिक और शासन संबंधी चिंता का विषय है। इसका किसी भी सूचीबद्ध कॉर्पोरेट संस्थाओं, शेयर बाजारों या वित्तीय एक्सचेंज फाइलिंग से कोई संबंध नहीं है। हितधारकों के लिए मुख्य ध्यान चल रहे फॉरेंसिक विश्लेषण और विभागीय जांच के परिणामों पर है, जिसका उद्देश्य सुरक्षा खामियों की पहचान करना और आगे अनुशासनात्मक उपायों की आवश्यकता का निर्धारण करना है।
