कर्नाटक: KPSC भ्रष्टाचार जांच के बीच IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार लापता

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
कर्नाटक: KPSC भ्रष्टाचार जांच के बीच IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार लापता

आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार **20 अगस्त 2026** से दिल्ली की यात्रा के बाद से संपर्क में नहीं हैं। उनका लापता होना कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन (KPSC) में भर्ती अनियमितताओं की प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के साथ मेल खाता है, जहां वह पहले काम कर चुके हैं।

क्या है पूरा मामला?

कर्नाटक सरकार इस वक्त 2016 बैच के IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार की स्थिति की समीक्षा कर रही है, जो कई दिनों से लापता हैं। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, अधिकारी, जो वर्तमान में MSME विभाग के निदेशक के तौर पर तैनात हैं, आखिरी बार केम्पेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर देखे गए थे और कथित तौर पर दिल्ली चले गए थे। 20 अगस्त 2026 से उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है और अधिकारी इस मामले की बारीकी से जांच कर रहे हैं।

KPSC जांच का साया

वरिष्ठ प्रशासक का अचानक गायब होना सार्वजनिक और प्रशासनिक ध्यान आकर्षित कर रहा है, खासकर कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन (KPSC) की चल रही जांच के मद्देनजर। प्रवर्तन निदेशालय (ED) कथित भर्ती अनियमितताओं, जिसमें पशु चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया भी शामिल है, को लेकर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहा है। श्री गंगवार मार्च 2026 तक KPSC में परीक्षा नियंत्रक के पद पर रह चुके हैं, जिससे उनका पिछला कार्यकाल भी जांच के दायरे में आ गया है।

क्या परिवार ने दर्ज कराई शिकायत?

हालांकि राज्य के अधिकारियों और गृह मंत्री ने इस मामले पर संज्ञान लिया है, लेकिन यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि अभी तक अधिकारी के परिवार या किसी अन्य पक्ष की ओर से कोई औपचारिक गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है। इसके अलावा, हालांकि उनके लापता होने की समय-सीमा KPSC मामलों की व्यापक जांच के साथ मेल खाती है, सरकार ने उनकी वर्तमान स्थिति और चल रही भर्ती जांच के बीच कोई निश्चित संबंध स्थापित नहीं किया है।

KPSC अध्यक्ष पर भी जांच की सिफारिश

अलग से, कर्नाटक राज्य मंत्रिमंडल ने KPSC अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार के कार्यों की जांच की सिफारिश की है, जो भर्ती और भाई-भतीजावाद से संबंधित विभिन्न आरोपों के चलते चर्चा में हैं। यह स्थिति राज्य में शासन के लिए चिंता का एक महत्वपूर्ण बिंदु बनी हुई है, क्योंकि यह सार्वजनिक भर्ती प्रक्रियाओं की सत्यनिष्ठा को प्रभावित करती है। हितधारकों और आम जनता के लिए, मुख्य बात अधिकारी के स्थान के संबंध में चल रही पुलिस सत्यापन के परिणाम और KPSC जांच के संबंध में किसी भी आगे की आधिकारिक घोषणा होगी।

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