कर्नाटक हाईकोर्ट ने ED द्वारा Genpact के गुरुग्राम हेडक्वार्टर की जब्ती को सही ठहराया है, लेकिन कंपनी के लिए एक राहत भरी खबर भी है। कोर्ट ने ED को निर्देश दिया है कि वह GIFT सिटी में **$100 मिलियन** के प्रस्तावित निवेश को खारिज करने के अपने फैसले पर लिखित स्पष्टीकरण दे।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने Genpact इंडिया और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के बीच चल रहे कानूनी विवाद पर अपना रुख साफ कर दिया है। कोर्ट ने 2015 के फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन की जांच के तहत FEMA के नियमों के आधार पर कंपनी के गुरुग्राम हेडक्वार्टर को जब्त करने के ED के फैसले को सही माना है।
संपत्ति पर पाबंदी, लेकिन कामकाज जारी
हालांकि प्रॉपर्टी को अटैच (Seize) कर दिया गया है, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कंपनी वहां से अपना रोजमर्रा का कामकाज जारी रख सकती है। फिलहाल, इस संपत्ति पर 'एनकंबरेंस' (Encumbrance) लगा है, यानी जांच पूरी होने तक Genpact इस संपत्ति को बेच या गिरवी नहीं सकती।
क्या है विवाद की जड़?
यह जांच $737.5 मिलियन के विदेशी डिबेंचर से जुड़ी है। ED का आरोप है कि इन पैसों को भारत में लाकर तुरंत बाहर भेज दिया गया, जिससे स्थानीय इकाई पर अनावश्यक कर्ज का बोझ पड़ा। वहीं, कंपनी का कहना है कि यह पूरा कर्ज 2018 से 2023 के बीच चुकाया जा चुका है।
GIFT सिटी निवेश पर बड़ा अपडेट
कंपनी के लिए बड़ी राहत की बात यह है कि कोर्ट ने ED को लताड़ लगाई है। कोर्ट ने कहा कि केवल जांच चलने के नाम पर किसी नए निवेश को खारिज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने ED को 10 दिन का समय दिया है कि वह Genpact के $100 मिलियन वाले GIFT सिटी प्रोजेक्ट को रिजेक्ट करने का ठोस और लिखित कारण पेश करे।
अब सबकी नजरें इस 10 दिनों की डेडलाइन पर हैं, जिसके बाद ही यह तय होगा कि कंपनी को अपने विस्तार के लिए अनुमति मिलेगी या नहीं।
