कर्नाटक में 15 अगस्त 2026 को हुए फॉरेस्ट शूटआउट की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। रिपोर्ट में करीबी से गोली लगने की पुष्टि हुई है, जिससे कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। इस घटना में वन विभाग के ढाँचे को भारी नुकसान हुआ है, जिसकी अनुमानित लागत ₹50 लाख से ₹1 करोड़ के बीच है।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में क्या हुआ खुलासा?
15 अगस्त 2026 को कर्नाटक के चामराजनगर जिले में हुए फॉरेस्ट शूटआउट में मारे गए लोगों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ितों की मौत करीबी से शॉटगन से चलाई गई गोलियों के कारण हुई है। गोली लगने से छाती, पेट और जांघों में गंभीर चोटें आई हैं, साथ ही पसलियां भी टूट गई हैं। ये मेडिकल निष्कर्ष वन विभाग के अधिकारियों के शुरुआती दावों के विपरीत हैं, जिन्होंने इस मुठभेड़ को 'एंटी-पोचिंग ऑपरेशन' के दौरान हुई जवाबी कार्रवाई बताया था।
राजनीतिक घमासान!
इस घटना ने कर्नाटक और तमिलनाडु की सरकारों के बीच एक बड़े राजनीतिक टकराव को जन्म दे दिया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने हत्याओं की निंदा करते हुए उच्च-स्तरीय जांच और पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है। वहीं, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने राज्य के प्रशासनिक रुख का बचाव करते हुए पड़ोसी राज्य से आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने की अपील की है। उन्होंने यह भी पुष्टि की है कि मजिस्ट्रेट-स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
सरकारी संपत्ति को करोड़ों का नुकसान
प्रशासनिक और वित्तीय दृष्टिकोण से, इस घटना के गंभीर परिणाम हुए हैं। घटना के बाद हुए सार्वजनिक हंगामे में वन विभाग के एंटी-पोचिंग कैंपों और अन्य स्थानीय बुनियादी ढाँचे को नुकसान पहुँचाया गया। आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, सरकारी संपत्तियों को हुआ वित्तीय नुकसान ₹50 लाख से ₹1 करोड़ के बीच है। सार्वजनिक संपत्ति का यह नुकसान सीधे खजाने पर बोझ है और यह स्थानीय संरक्षण और एंटी-पोचिंग प्रयासों की परिचालन क्षमता को भी बाधित कर सकता है।
बीजेपी का भी सरकार पर सवाल
इस बीच, कर्नाटक बीजेपी ने भी मामले में हस्तक्षेप किया है। प्रदेश अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र ने सरकार पर घटना के क्रम के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने का आरोप लगाया है। उच्च-स्तरीय जांच की मांगें बढ़ने के साथ, स्थिति राजनीतिक रूप से संवेदनशील बनी हुई है।
