कर्नाटक में सरकारी नौकरी की भर्ती में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। राज्य की CID ने 2016 बैच के IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को ओएमआर (OMR) शीट से छेड़छाड़ और घूसखोरी के आरोपों में हिरासत में ले लिया है।
भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर उठ रहे सवालों के बीच कर्नाटक CID ने बड़ी कार्रवाई की है। 30 अगस्त, 2026 को ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को हिरासत में लिया गया। यह पूरा मामला 400 वेटनरी ऑफिसर पदों की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसमें बड़े स्तर पर धांधली का शक है।
क्या है पूरा मामला?
आरोपों के मुताबिक, गंगवार जब KPSC में 'कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन' थे, तब OMR शीट में हेरफेर की गई थी। जांचकर्ताओं को करीब ₹1.1 करोड़ की रिश्वत के सबूत मिले हैं, जो सीधे तौर पर उम्मीदवारों के साथ मिलीभगत की ओर इशारा करते हैं। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 28 जुलाई, 2026 को इसे CID को सौंप दिया गया था।
ED का भी कसा शिकंजा
केवल CID ही नहीं, बल्कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले में एक्शन मोड में है। 23 अगस्त, 2026 को ED ने बेंगलुरु और बरेली में गंगवार से जुड़ी संपत्तियों पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत की गई है, जिससे पता चलता है कि सरकारी भर्ती में पैसों का खेल कितनी गहराई तक फैला हुआ है।
फिलहाल गंगवार पर Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) और कर्नाटक पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट के तहत कानूनी प्रक्रिया चल रही है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि रिमांड के दौरान पूछताछ में और कौन-कौन से बड़े नाम सामने आते हैं और क्या राज्य सरकार भर्ती प्रक्रियाओं में कोई बड़ा बदलाव करती है।
