कर्नाटक विधानसभा में चौथे दिन भी विपक्षी पार्टियों का हंगामा जारी रहा। मंत्री बी. नागेंद्र पर वाल्मीकि एसटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में कथित गबन के आरोप हैं। विपक्ष ने कार्यवाही का बहिष्कार किया है, वहीं सरकार बिल पास कराने में लगी है। कर्नाटक हाई कोर्ट द्वारा मंत्री की जमानत शर्तों में बदलाव के बाद यह राजनीतिक गतिरोध और बढ़ गया है।
चौथे दिन भी विधानसभा में गतिरोध बरकरार
गुरुवार, 20 अगस्त, 2026 को कर्नाटक विधानसभा में लगातार चौथे दिन भी गतिरोध बना रहा। विपक्षी दल - बीजेपी और जेडी(एस) - मंत्री बी. नागेंद्र को कैबिनेट से हटाने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मंत्री का कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में हुए करोड़ों के गबन में हाथ है।
मंत्री के इस्तीफे और वापसी पर बवाल
मंत्री नागेंद्र ने जून 2024 में इन आरोपों के सामने आने के बाद इस्तीफा दे दिया था, लेकिन 3 अगस्त, 2026 को उन्हें फिर से कैबिनेट में शामिल कर लिया गया। मंत्री की इस वापसी से विपक्ष भड़क गया है। उनका कहना है कि सरकार प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जैसी एजेंसियों की जांच को नजरअंदाज कर रही है।
हंगामे के बीच सरकारी कामकाज जारी
विपक्ष के लगातार हंगामे और कार्यवाही के बहिष्कार के बावजूद, सत्तारूढ़ सरकार ने विधायी कार्यों को जारी रखा। गुरुवार को सदन ने बैंगलोर डेवलपमेंट अथॉरिटी (संशोधन) बिल, 2026 और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (संशोधन) बिल, 2026 सहित कई बिल पास किए। यह दर्शाता है कि राजनीतिक उठापटक के बीच भी राज्य सरकार महत्वपूर्ण नीति-निर्माण और व्यावसायिक स्वीकृतियों पर काम कर रही है।
मंत्री की जमानत शर्तों में बदलाव
इस बीच, मंत्री से जुड़े कानूनी मामले में भी एक नया मोड़ आया है। 20 अगस्त, 2026 को कर्नाटक हाई कोर्ट ने नागेंद्र की जमानत शर्तों में बदलाव करते हुए उन्हें अब भारत में यात्रा करने के लिए कोर्ट की पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर प्रतिबंध अभी भी लागू है। मंत्री वाल्मीकि कॉर्पोरेशन मामले में जांच के दायरे में बने हुए हैं, और यह राजनीतिक गतिरोध विधानसभा की चर्चाओं पर हावी है।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
क्षेत्रीय कारोबारी माहौल पर नजर रखने वाले लोगों के लिए, राज्य सरकार की स्थिरता एक महत्वपूर्ण कारक है। हालांकि ऐसे राजनीतिक गतिरोध शोर पैदा कर सकते हैं, लेकिन महत्वपूर्ण विधेयकों का पारित होना यह संकेत देता है कि सरकारी मशीनरी का कामकाज काफी हद तक सुचारू है। कर्नाटक स्थित इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी विकास परियोजनाओं पर नजर रखने वाले निवेशक इस राजनीतिक तनाव के प्रोजेक्ट कार्यान्वयन की गति या भविष्य की राज्य-स्तरीय स्वीकृतियों को कैसे प्रभावित करता है, इस पर नजर रख सकते हैं।
