कर्नाटक के कावेरी वन्यजीव अभयारण्य में शनिवार सुबह जंगल के कर्मचारियों और तीन संदिग्ध शिकारियों के बीच हुई मुठभेड़ में 3 लोगों की मौत हो गई। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और वन विभाग के दफ्तर में तोड़फोड़ भी की। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं।
घटना का विवरण
कर्नाटक के चामराजनगर जिले में शनिवार, 15 अगस्त 2026 की सुबह एक दुखद घटना सामने आई। कावेरी वन्यजीव अभयारण्य के होलमुरादत्ती जंगल क्षेत्र में वन विभाग के कर्मचारियों और तीन संदिग्ध शिकारियों के बीच हुई गोलीबारी में 3 लोगों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान थॉमियार पाल्या गांव के निवासी एंटोनिसवामी, पीटर और कुमार के रूप में हुई है।
वन अधिकारियों के अनुसार, गश्ती दल ने इन व्यक्तियों को रोका जो कथित तौर पर अवैध शिकार की गतिविधियों में शामिल थे। वन विभाग की रिपोर्टों के अनुसार, मारे गए लोगों के पास से देसी-कट्टे और हिरण का मांस बरामद हुआ। इस मुठभेड़ में वन विभाग का एक कर्मचारी भी घायल हुआ है।
स्थानीय प्रतिक्रिया और विरोध
इस घटना से स्थानीय समुदाय में भारी आक्रोश फैल गया। घटना के बाद, गुस्साए ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया और स्थानीय वन विभाग के कार्यालय में तोड़फोड़ की। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात कर दिया है। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए कोलार सरकारी अस्पताल ले जाया गया है, जहां सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
प्रशासनिक जांच
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने घटना पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि सरकार को इस बारे में शनिवार सुबह ही सूचना मिल गई थी। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। इस जांच का उद्देश्य घटनाओं के क्रम को स्पष्ट करना, मुठभेड़ की प्रकृति का सत्यापन करना और यह सुनिश्चित करना है कि वन कर्मियों की कार्रवाई कानूनी प्रोटोकॉल के अनुसार थी या नहीं।
वन प्रशासन पर प्रभाव
यह घटना वन्यजीव अभयारण्यों के प्रबंधन में वन विभागों के सामने आने वाली चुनौतियों को उजागर करती है। ऐसे संरक्षित क्षेत्रों में, प्रवर्तन टीमों और स्थानीय लोगों के बीच टकराव गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकता है। मजिस्ट्रियल जांच के निष्कर्ष स्थानीय प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट होंगे। यह जांच स्पष्ट करेगी कि क्या यह घटना एक नियमित शिकार-विरोधी अभियान का परिणाम थी या इसमें प्रक्रियात्मक चूक हुई थी। वन कर्मियों की सुरक्षा और क्षेत्र में शांति बनाए रखना जिला प्रशासन की तत्काल प्राथमिकता है।
