राज्यसभा सांसद Kapil Sibal ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर Election Commission of India की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया को चुनौती दी है। इसमें चुनावी डेटाबेस से सुनियोजित तरीके से नाम हटाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग द्वारा चल रहे 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' अभ्यास के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में मांग की गई है कि चुनावी रोल के रखरखाव के नाम पर विशिष्ट जनसांख्यिकी (demographics) के वोटर्स को सिस्टम से हटाने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए और न्यायिक हस्तक्षेप किया जाए।
गोंडा जिले का मामला और विवाद
सिब्बल की याचिका में विशेष रूप से झारखंड के गोंडा जिले का जिक्र किया गया है। आरोप है कि राजनीतिक एजेंटों द्वारा स्थानीय वोटर लिस्ट से अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों के नाम हटवाने की कोशिश की जा रही है, जो चुनावी प्रक्रिया की सटीकता पर सीधा सवाल उठाता है।
विपक्ष का हमला और डेटा के दावे
यह कदम इंडियन नेशनल कांग्रेस (Indian National Congress) द्वारा चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए गए सवालों के बाद आया है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी लगातार संस्थानों पर सवाल उठा रहे हैं। राहुल गांधी ने महाराष्ट्र का हवाला देते हुए दावा किया है कि हालिया रिवीज़न साइकल के दौरान 2 करोड़ से अधिक वोटर्स को ड्राफ्ट रोल से बाहर कर दिया गया था। विपक्षी दलों का आरोप है कि राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में वोट शेयर को प्रभावित करने के लिए यह एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है।
फिलहाल, Election Commission और Bharatiya Janata Party की ओर से इन विशिष्ट आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है। अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है और चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है।
