कर्नाटक में 400 वेटनरी ऑफिसर्स की भर्ती में हुए घोटाले की आंच अब प्राइवेट सर्विस प्रोवाइडर Edutest Solutions तक पहुंच गई है। जांच एजेंसियां अब रिश्वतखोरी और परीक्षा में धांधली की कड़ियों को जोड़ रही हैं।
कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन (KPSC) भर्ती घोटाले की जांच अब सरकारी अधिकारियों के दायरे से बाहर निकलकर प्राइवेट सेक्टर तक पहुंच गई है। जांच एजेंसियां अब Edutest Solutions Pvt Ltd की भूमिका को खंगाल रही हैं, जो 400 वेटनरी ऑफिसर्स की भर्ती परीक्षा में डिजिटल इवैल्यूएशन के लिए जिम्मेदार थी। इस मामले में पेपर लीक होने, OMR शीट के साथ छेड़छाड़ करने और ₹40 लाख से लेकर ₹1 करोड़ तक की रिश्वत के आरोप लगे हैं।
ED और CID की संयुक्त कार्रवाई
इस घोटाले की जांच क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) और डायरेक्टरेट ऑफ एनफोर्समेंट (ED) द्वारा की जा रही है। मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि परीक्षा नियंत्रक (Controller of Examinations) रहे IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को सस्पेंड कर गिरफ्तार किया गया है। साथ ही, KPSC चेयरमैन साहूकार एस. शिवशंकरप्पा को भी पद से हटा दिया गया है। ED ने अब तक 20 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की है ताकि गैर-कानूनी पैसों के लेन-देन का पता लगाया जा सके।
प्राइवेट सेक्टर के लिए बड़ी चेतावनी
यह घटना प्राइवेट कंपनियों के लिए एक बड़ा 'रिस्क फैक्टर' बनकर उभरी है। सरकारी भर्ती और परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनियों को अब सख्त ऑडिट, फॉरेंसिक जांच और कड़ी छानबीन (Background Checks) से गुजरना पड़ सकता है। Edutest Solutions के खिलाफ जांच से साफ है कि सरकार अब केवल सरकारी कर्मचारियों को ही नहीं, बल्कि इसमें शामिल हर स्टेकहोल्डर को जवाबदेह ठहराना चाहती है।
आगे की राह
कर्नाटक हाई कोर्ट इस मामले की निगरानी कर रहा है और सरकार से जांच की पारदर्शिता पर सवाल पूछे हैं। राजनीतिक दलों की ओर से इस केस को CBI को सौंपने की मांग तेज हो गई है। निवेशकों और प्रशासनिक सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों को अब हाई कोर्ट के अगले फैसले, डिजिटल रिकॉर्ड्स के फॉरेंसिक ऑडिट और सरकार की नई कॉन्ट्रैक्ट पॉलिसी पर नज़र रखनी होगी।
