झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। इन परीक्षाओं में 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा भी शामिल है। कोर्ट ने सफल उम्मीदवारों को तुरंत ड्यूटी फिर से शुरू करने का निर्देश दिया है। राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा, जिससे इन नियुक्तियों की अंतिम स्थिति आगे की कानूनी कार्यवाही पर निर्भर करेगी।
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला!
झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले पर 20 अगस्त 2026 को अंतरिम रोक लगा दी, जिसके तहत 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया था। इस फैसले से हजारों उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिली है, खासकर उन लोगों को जो 11वीं से 13वीं झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती के बाद सरकारी पदों पर नियुक्त हो चुके थे।
क्या है कोर्ट का आदेश?
कोर्ट के निर्देश के बाद, जिन उम्मीदवारों का चयन पहले हो चुका था और उन्होंने अपनी ड्यूटी भी शुरू कर दी थी, अब वे तत्काल अपना काम फिर से शुरू कर सकते हैं। बेंच ने राज्य सरकार से 15 दिनों के भीतर एक विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है, जिसमें 18 अगस्त 2026 को जारी किए गए रद्द करने के आदेश का औचित्य साबित करना होगा। जब तक कोर्ट इस जवाब की समीक्षा नहीं कर लेता, तब तक सरकार की इन भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द करने की योजना स्थगित रहेगी।
क्यों रद्द हुई थीं परीक्षाएं?
दरअसल, सरकार का यह फैसला लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलनों के बाद आया था। JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच जैसे छात्र समूहों ने भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं और पेपर लीक का आरोप लगाया था, खासकर थर्ड-पार्टी एजेंसी TSR Data Processing Pvt Ltd की संलिप्तता का। इन विरोधों के कारण राज्य प्रशासन ने 2014 से आयोजित परीक्षाओं की जांच के लिए CID और SIT को जांच के आदेश दिए थे।
शेयर बाजार पर कोई असर नहीं!
हालांकि यह राज्य के प्रशासन और कानूनी व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है, लेकिन बाजार के जानकारों के लिए यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन एक संवैधानिक सरकारी संस्था है, न कि कोई लिस्टेड कंपनी। इसलिए, इस कानूनी घटनाक्रम का शेयर बाजार की कीमतों, एक्सचेंज फाइलिंग या किसी भी कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।
आगे क्या?
आगे इस मामले पर राज्य सरकार हाई कोर्ट में क्या जवाब दाखिल करती है, यह देखना अहम होगा। सरकार को छात्रों की पारदर्शिता की मांग और पहले से चयनित उम्मीदवारों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाना होगा। इस बीच, विरोध प्रदर्शन या प्रशासनिक देरी का जोखिम बना रह सकता है, क्योंकि नियुक्तियों की अंतिम वैधता जारी कानूनी कार्यवाही और राज्य की आंतरिक जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी।
