झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली मामले में CID ने दो और लोगों को दबोचा है। JSSC और JPSC केस में अब तक **30** से ज्यादा गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जबकि हाई कोर्ट ने परीक्षाओं को रद्द करने के सरकार के आदेश पर रोक लगा दी है।
भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। CID ने हाल ही में दो और गिरफ्तारियां की हैं, जो राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया पर उठ रहे बड़े सवालों को और गहरा करती हैं।
गिरफ्तारी और जांच का ब्यौरा
CID ने JSSC-CGL 2023 परीक्षा से जुड़े मामले में दिलीप कुमार पासवान को गिरफ्तार किया है, जिसके बाद इस केस में कुल गिरफ्तारियों की संख्या 13 हो गई है। वहीं, दूसरी ओर JPSC भर्ती जांच के सिलसिले में रांची के एक कोचिंग सेंटर संचालक संजीत कुमार को पकड़ा गया है। गौर करने वाली बात यह है कि JPSC मामले में अब तक 20 से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जिनमें अगस्त में पकड़े गए पूर्व JPSC चेयरमैन एल. खियांग्ते भी शामिल हैं।
अदालती पेच और अनिश्चितता
भले ही सरकार ने धांधली के आरोपों के बाद परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था, लेकिन अब यह मामला कानूनी उलझन में फंस गया है। झारखंड हाई कोर्ट ने सरकार के इस आदेश पर स्टे लगा दिया है, जिससे हजारों उम्मीदवारों के करियर पर तलवार लटकी हुई है।
ED की एंट्री और रिस्क फैक्टर
इस भर्ती घोटाले की आंच अब संघीय जांच एजेंसी ED तक पहुंच गई है। मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से हो रही अलग जांच ने राज्य में प्रशासनिक जोखिमों को और बढ़ा दिया है। निवेशकों और प्रशासनिक कामकाज पर नजर रखने वालों के लिए यह एक बड़े 'सिस्टम रिस्क' की तरह है, जहां गवर्नेंस में कमी से कानूनी लड़ाइयां और कामकाज में देरी का सामना करना पड़ रहा है। अब सबकी निगाहें हाई कोर्ट की अगली सुनवाई और ED की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे तय होगा कि पुरानी भर्तियां बहाल होंगी या पूरी प्रक्रिया नए सिरे से शुरू करनी होगी।
