रांची की एक विशेष PMLA कोर्ट ने झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren के खिलाफ **8.86 एकड़** जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए हैं। इसके साथ ही अब यह मामला जांच के दायरे से निकलकर पूरी तरह से न्यायिक ट्रायल (Judicial Trial) में पहुंच गया है।
रांची स्थित विशेष प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) कोर्ट के इस फैसले ने मामले को एक नई दिशा दे दी है। अब अदालत में साक्ष्यों और गवाहों के बयानों की प्रक्रिया शुरू होगी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आरोप लगाया है कि इस जमीन के अधिग्रहण के दौरान सरकारी रिकॉर्ड्स में हेरफेर की गई और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ। हालांकि, मुख्यमंत्री की कानूनी टीम इन दावों को सिरे से खारिज करती आई है और एजेंसी के सबूतों पर सवाल उठाती रही है।
यह घटनाक्रम झारखंड हाईकोर्ट के उस हालिया आदेश के बाद आया है, जिसमें मुख्य न्यायाधीश MS Sonak और न्यायमूर्ति Manoj Prasad की खंडपीठ ने निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने की याचिका को खारिज कर दिया था। गौरतलब है कि Hemant Soren को 31 जनवरी, 2024 को गिरफ्तार किया गया था और बाद में जून 2024 में उन्हें जमानत मिली थी।
इस मामले में कुल 17 लोग आरोपी हैं और अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ आरोप पहले ही तय किए जा चुके हैं। राज्य में चल रही यह कानूनी प्रक्रिया राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि शासन में निरंतरता और स्थिरता किसी भी राज्य के कारोबारी माहौल के लिए एक प्रमुख कारक होती है। अब आगामी सुनवाइयों में दस्तावेजों की प्रमाणिकता और गवाहों की भूमिका पर अदालत का ध्यान केंद्रित रहेगा।
