Jammu and Kashmir and Ladakh High Court ने नेताओं को सरकारी आवास मिलने की प्रक्रिया पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने प्रशासन से उन नियमों का स्पष्टीकरण मांगा है, जिनके तहत Ghulam Nabi Azad और Ravinder Raina को मार्च 2027 तक सरकारी घर में रहने की अनुमति दी गई है।
सरकारी संपत्ति और पारदर्शिता पर सवाल
चीफ जस्टिस Pushpendra Singh Bhati और जस्टिस Rajesh Sekhri की डिविजन बेंच ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से उस कानूनी ढांचे के बारे में सवाल किया है, जिसके आधार पर राजनीतिक हस्तियों को सरकारी आवास बरकरार रखने की छूट दी जा रही है। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और प्रशासन को एक समान और लिखित नीति पेश करनी होगी।
क्या है विवाद?
कोर्ट का यह दखल Ghulam Nabi Azad और Ravinder Raina के मामले पर सुनवाई के दौरान आया है। प्रशासन ने कोर्ट को जानकारी दी थी कि 14 अगस्त को एक विशेष समिति ने इन नेताओं के मामलों की समीक्षा की और उन्हें मार्च 2027 तक सरकारी आवास में बने रहने की सिफारिश की थी।
यह मामला 2020 में Professor S.K. Bhalla द्वारा दायर एक PIL (जनहित याचिका) से जुड़ा है, जो सुरक्षा के नाम पर सरकारी संपत्तियों के कब्जे को चुनौती देती है। याचिकाकर्ता के वकील ने याद दिलाया कि 2018 में न्यायिक दबाव के बाद 180 से अधिक नेताओं को सरकारी बंगले खाली करने पड़े थे।
आगे क्या होगा?
प्रशासन ने कोर्ट से नियमों का विस्तृत ब्यौरा देने के लिए मोहलत मांगी है, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। अब अगली सुनवाई 12 नवंबर को तय की गई है। निवेशकों और आम जनता की नजर इस बात पर है कि क्या प्रशासन कोई स्पष्ट पॉलिसी डॉक्यूमेंट कोर्ट के सामने रख पाएगा या नहीं।
