सोशल मीडिया पर वायरल हो रही CO2-पावर्ड एयर पिस्टल के जरिए सेल्फ-डिफेंस की सलाह विवादों में है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत सेल्फ-डिफेंस का अधिकार 'प्रोपोर्शनलिटी' (आनुपातिकता) के टेस्ट पर टिका है। बिना लाइसेंस वाली एयर गन का गलत इस्तेमाल आपको जेल की हवा खिला सकता है।
सोशल मीडिया पर सेल्फ-डिफेंस के लिए एयर पिस्टल इस्तेमाल करने की सलाह तेजी से वायरल हो रही है, लेकिन कानूनी एक्सपर्ट्स ने इसे लेकर गंभीर चेतावनी दी है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली सलाह और असल कानून की जटिलताओं के बीच बड़ा अंतर है।
प्रोपोर्शनलिटी का जाल
भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत हर नागरिक को अपनी सुरक्षा का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार 'प्रोपोर्शनलिटी' के सिद्धांत पर आधारित है। इसका मतलब है कि आप जितनी हिंसा का सामना कर रहे हैं, उसी के अनुपात में ही बल प्रयोग कर सकते हैं। यदि आप बिना जानलेवा खतरे के एयर गन का इस्तेमाल करते हैं, तो अदालत इसे 'अत्यधिक बल प्रयोग' मान सकती है। ऐसे में पीड़ित पर ही गंभीर चोट पहुँचाने या जीवन खतरे में डालने जैसे क्रिमिनल केस दर्ज हो सकते हैं।
नियम और सुरक्षा जोखिम
आर्म्स रूल्स, 2016 के मुताबिक, 20 जूल से कम म्युल एनर्जी और .177 बोर वाली एयर गन के लिए लाइसेंस की जरूरत नहीं होती। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि ये हथियार 'खिलौने' हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रेनिंग के बिना हथियार ले जाना खतरनाक है; झड़प के दौरान कोई आपका हथियार छीनकर उसे आपके ही खिलाफ इस्तेमाल कर सकता है।
पब्लिक स्पेस में पाबंदी
कानूनन एयर गन रखना अपराध नहीं है, लेकिन इसे कहीं भी लेकर जाना गलत है। मेट्रो स्टेशन, एयरपोर्ट और संवेदनशील इलाकों में ऐसी चीजों को ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। अपनी सुरक्षा के लिए इसे लेकर चलने वाला व्यक्ति जाने-अनजाने में बड़े कानूनी पचड़े में फंस सकता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि डिवाइस पर निर्भर रहने के बजाय सिचुएशनल अवेयरनेस और नॉन-लीथल डिफेंस तकनीकों पर ध्यान देना ज्यादा सुरक्षित है।
