अचानक हुई छंटनी से कर्मचारी अक्सर उलझन में पड़ जाते हैं। हालांकि कंपनियां बिजनेस जरूरतों के लिए रिस्ट्रक्चरिंग कर सकती हैं, लेकिन उन्हें 'Industrial Relations Code' और रोजगार अनुबंधों (Employment Contracts) के तहत नोटिस और सेवरेंस (Severance) के नियमों का पालन करना अनिवार्य है।
कानूनी दायरा और कंपनियों की जिम्मेदारी
आईटी सेक्टर में हालिया उठापटक के बाद कंपनियों द्वारा अचानक छंटनी करने के तरीके पर बहस तेज हो गई है। कई कर्मचारियों को ईमेल के जरिए नौकरी से निकाला जा रहा है और उनका सिस्टम एक्सेस तुरंत बंद किया जा रहा है। कंपनियां इसे ऑपरेशनल रिस्ट्रक्चरिंग का नाम देती हैं, लेकिन भारत के लेबर कानून कंपनियों को मनमानी करने की खुली छूट नहीं देते।
Industrial Relations Code का महत्व
भारतीय कानून के मुताबिक, जिन कर्मचारियों ने 1 साल या उससे अधिक लगातार सेवा दी है, उन्हें छंटनी के वक्त नोटिस पीरियड या उसके बदले सैलरी और कानूनी सेवरेंस (Severance Pay) पाने का पूरा हक है।
'वर्कर' और 'नॉन-वर्कर' में फर्क
कानूनी तौर पर आपको मिलने वाली सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि आप किस श्रेणी में आते हैं।
- वर्कर्स: इन्हें Industrial Relations Code, 2020 के तहत कानूनी सुरक्षा मिलती है।
- मैनेजरियल/एडमिनिस्ट्रेटिव: ये मुख्य रूप से अपने एम्प्लॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट (Employment Contract) की शर्तों से बंधे होते हैं।
जरूरी दस्तावेज संभालें
सिस्टम से एक्सेस हटाना कानूनी रूप से गलत नहीं है, लेकिन यह छंटनी की आधिकारिक तारीख तय करता है। यदि आप ऐसी स्थिति का सामना कर रहे हैं, तो ये दस्तावेज सुरक्षित रखें:
- अप्वाइंटमेंट लेटर और विस्तृत कॉन्ट्रैक्ट।
- हालिया पे-स्लिप्स (Pay slips)।
- रिस्ट्रक्चरिंग से संबंधित कोई भी आधिकारिक ईमेल या कम्युनिकेशन।
किसी भी विवाद की स्थिति में इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल (Industrial Tribunals) या सिविल फोरम में जाने के लिए इन कागजों का होना सबसे जरूरी है। कंपनी छंटनी कर सकती है, लेकिन वे किसी भी हाल में नोटिस या पेमेंट के कानूनी दायित्वों से बच नहीं सकतीं।
